भोपाल | मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नगर निगम प्रशासन द्वारा रहवासी इलाकों में अवैध रूप से संचालित हो रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ आज बड़े स्तर पर सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है। इस अभियान को अंजाम देने के लिए निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की कुल 6 विशेष टीमें गठित की गई हैं। यह सभी टीमें भारी पुलिस बल के साथ शहर के विभिन्न इलाकों में मैदान पर उतर चुकी हैं। इससे पहले निगम ने शनिवार को इन दुकानों के बाहर नोटिस चस्पा कर दुकानदारों को 24 घंटे के भीतर खुद दुकानें बंद करने का अंतिम अल्टीमेटम दिया था।
24 घंटे की मोहलत और पंचनामा कार्रवाई
नगर निगम की ओर से दी गई 24 घंटे की मोहलत के बाद गौतम नगर सहित कई अन्य रिहायशी क्षेत्रों में कारोबारियों ने स्वतः अपनी दुकानें बंद कर ली हैं। जिन दुकानदारों ने दुकानें बंद कर दी हैं, निगम की टीमें मौके पर पहुंचकर उनकी वर्तमान स्थिति का जायजा लेंगी और पंचनामा तैयार करेंगी। नियम के अनुसार, एक बार सील होने के बाद यह संस्थान बिना माननीय न्यायालय की अनुमति के दोबारा नहीं खोले जा सकेंगे।
62,500 संस्थान हैं कार्रवाई के दायरे में
इस व्यापक अभियान के लिए बनाई गई निगम की 6 टीमों में दल प्रभारी, सहायक दल प्रभारी, संबंधित जोनल अधिकारी, वार्ड प्रभारी, अतिक्रमण अधिकारी, तकनीकी अधिकारी और उपयंत्री या भवन निरीक्षक को शामिल किया गया है। पूरी कार्रवाई संबंधित जोनल अधिकारियों की कड़ी निगरानी में की जा रही है। नगर निगम के इस सख्त अभियान के दायरे में शहर के लगभग 62,500 व्यावसायिक संस्थान आ रहे हैं।
किन-किन इलाकों में होगी सीलिंग?
निगम की यह सीलिंग कार्रवाई शहर की सभी 6 प्रमुख विधानसभा क्षेत्रों में की जा रही है। इनमें मुख्य रूप से उत्तर विधानसभा, नरेला, दक्षिण-पश्चिम विधानसभा, मध्य विधानसभा, गोविंदपुरा और हुजूर विधानसभा क्षेत्र के कई घनी आबादी वाले रहवासी इलाके शामिल हैं। गौरतलब है कि इससे पहले जुलाई माह के अंतिम सप्ताह में भी अरेरा कॉलोनी से लेकर बावड़िया कलां तक सीलिंग की कार्रवाई की गई थी, हालांकि उस समय कुछ ही समय बाद दुकानें दोबारा खुल गई थीं, लेकिन इस बार प्रशासन पूरी सख्ती के मूड में है।
क्यों की जा रही है यह सीलिंग?
यह पूरी कार्रवाई भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के निर्देशों के पालन में की जा रही है। कोर्ट के स्पष्ट आदेश हैं कि किसी भी रिहायशी कॉलोनी या आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन और अवैध निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित हैं तथा इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। पूर्व में भी जब इस तरह की सीलिंग की गई थी, तब व्यापारियों ने इसका काफी विरोध किया था, बावजूद इसके नियमों का सख्ती से पालन कराने के लिए निगम ने यह कदम उठाया है।





