पुणे| महाराष्ट्र के पुणे शहर के मांजरी इलाके में अपनी 14 सूत्रीय मांगों को लेकर आदिवासी छात्र पिछले दो हफ्तों से लगातार आंदोलन कर रहे हैं। इस बड़े आंदोलन में हजारों की संख्या में छात्र शामिल हैं, और कुछ छात्र अपनी मांगों के समर्थन में आमरण अनशन पर भी बैठे हुए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य के आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) मंत्री नरहरी झिरवल ने स्वयं आंदोलन स्थल पहुंचकर छात्रों से मुलाकात की और उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की। हालांकि, छात्र अपनी जिद पर अड़े हुए हैं और उनका साफ कहना है कि जब तक उनकी मांगों के संबंध में कोई लिखित सरकारी आदेश (GR) जारी नहीं किया जाता, तब तक वे अपना आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे।

पांच घंटे चली लंबी बैठक, लिखित आदेश की मांग

आंदोलन का कोई सार्थक समाधान निकालने के लिए आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके ने 15 सदस्यीय छात्र प्रतिनिधिमंडल के साथ करीब पांच घंटे तक मैराथन बैठक की। बैठक के बाद चर्चा सकारात्मक रहने का दावा तो किया गया, लेकिन छात्रों की मांगों पर तुरंत कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आ सका।

मंत्रियों ने छात्रों से अनुरोध किया कि सरकार को इस पर विचार करने के लिए दो दिन का समय दिया जाए और वे अपना आमरण अनशन खत्म कर दें। इसके जवाब में छात्रों ने दो टूक कह दिया कि वे केवल मौखिक आश्वासनों के भरोसे अपना आंदोलन वापस नहीं लेंगे। एक प्रदर्शनकारी छात्र ने बताया कि मंत्रियों ने दो-तीन दिन के भीतर एक ड्राफ्ट और समय-सारणी तैयार करने की बात कही है, जिसकी समीक्षा के बाद ही अगला कदम उठाया जाएगा।

मंत्री नरहरी झिरवल के बयान पर गरमाई सियासत

इस बीच, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और मंत्री नरहरी झिरवल के आंदोलन स्थल पर दिए गए एक बयान को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। जब मंत्री छात्रों से मिलने पहुंचे, तो झिरवल ने हल्के-फुल्के अंदाज में छात्रों से कहा कि वे "खाते-पीते हुए अपना आंदोलन जारी रखें" और यह भी जोड़ा कि वे खुद भी अपने समय में चोरी-छिपे खाकर विरोध-प्रदर्शन किया करते थे।

मंत्री के इस बयान पर छात्रों ने तुरंत तीखी प्रतिक्रिया देते हुए जवाब दिया कि "यदि हमें खाते-पीते ही आंदोलन करना होता, तो आपको यहां आने की जरूरत ही नहीं पड़ती।" छात्रों के इस स्पष्ट और करारे जवाब के बाद राजनीतिक गलियारों में मंत्री के इस बयान की चर्चा जोरों पर है।

स्वास्थ्य बिगड़ने की चिंता और आगे की स्थिति

पिछले 14 दिनों से लगातार जारी अनशन और धरने के कारण अब कुछ आंदोलनकारी छात्रों की तबीयत बिगड़ने की खबर भी सामने आ रही है, जिससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। हालांकि सरकार की ओर से बातचीत के जरिए मामले को सुलझाने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं, लेकिन छात्रों की निगाहें अब सरकार के अगले दो दिनों में आने वाले फैसले और लिखित आदेश पर टिकी हैं।