पटना। बिहार की राजधानी की सबसे चर्चित सीटों में से एक, बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर सियासी पारा बेहद चढ़ चुका है। इस उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर के बीच सीधा और बेहद कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुकाबला महज एक विधानसभा सीट को जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके चुनावी नतीजे आने वाले समय में बिहार की पूरी राजनीतिक दिशा और दशा तय कर सकते हैं। यही वजह है कि दोनों ही खेमे अपनी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर चुके हैं। बीजेपी जहां एक तरफ अपने पारंपरिक सवर्ण मतदाताओं को लामबंद करने में जुटी है, वहीं पार्टी ने इस एक सीट की प्रतिष्ठा बचाने के लिए 40 दिग्गज स्टार प्रचारकों की भारी-भरकम फौज को प्रचार अभियान में उतार दिया है।
बांकीपुर में आर-पार की सियासी जंग
चुनावी सभाओं और प्रचार के दौरान जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर लगातार सत्ताधारी गठबंधन पर हमलावर हैं। उनका दावा है कि वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में बिहार की जनता ने नीतीश कुमार के नेतृत्व को जनादेश दिया था, लेकिन बीजेपी ने बीच में ही बड़ा सियासी दांव खेलकर और सत्ता परिवर्तन कर मुख्यमंत्री की कुर्सी अपने नाम कर ली। इसके साथ ही वे वर्तमान सम्राट चौधरी सरकार पर भ्रष्टाचार और लचर कार्यप्रणाली के गंभीर आरोप लगाते हुए बांकीपुर के प्रबुद्ध मतदाताओं से व्यवस्था परिवर्तन के लिए वोट करने की अपील कर रहे हैं। दूसरी ओर, भाजपा भी जन सुराज के दावों पर पलटवार करने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है। पार्टी समर्थकों द्वारा सोशल मीडिया और पटना की सड़कों पर लगाए गए विभिन्न पोस्टरों के जरिए प्रशांत किशोर को घेरा जा रहा है। हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ पोस्टरों को लेकर इंटरनेट यूजर्स उल्टे भाजपा से ही सवाल पूछ रहे हैं, जिससे यह डिजिटल जंग भी काफी रोचक हो गई है।
शुरुआत से ही इस उपचुनाव में बीजेपी की रणनीति काफी चर्चा का विषय बनी रही है। पार्टी ने पहले घोषित उम्मीदवार अभिषेक कुमार (बंटी) को बदलकर सभी को हैरान कर दिया, जिसके बाद नए प्रत्याशी के बयानों को लेकर भी सोशल मीडिया पर खूब चर्चाएं और राजनीतिक बहस देखने को मिली।
40 स्टार प्रचारक बनाम 'वन मैन आर्मी' प्रशांत किशोर
इस चुनावी जंग में खुद को मजबूत साबित करने के लिए भाजपा ने अपनी पूरी संगठनात्मक मशीनरी झोंक दी है। पार्टी की ओर से जारी 40 स्टार प्रचारकों की इस सूची में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष, और राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े जैसे कद्दावर नेताओं के नाम शामिल हैं। आमतौर पर इतनी बड़ी और दिग्गजों से सजी प्रचारकों की सूची आम विधानसभा चुनावों में ही देखने को मिलती है। लेकिन सिर्फ एक सीट के उपचुनाव के लिए इतने बड़े स्तर पर संसाधनों और नेताओं को झोंकना साफ दर्शाता है कि भाजपा के लिए यह सीट कितनी बड़ी साख का सवाल बन चुकी है।
वहीं, भाजपा के इस विशाल संगठनात्मक ढांचे और स्टार प्रचारकों की भारी भीड़ के सामने जन सुराज के मुखिया प्रशांत किशोर अकेले ही कमान संभाले हुए हैं। उनके साथ चुनावी मैदान में बीजेपी जैसी कोई बड़ी स्टार प्रचारक टीम नहीं है, बल्कि वे एक 'वन मैन आर्मी' की तरह खुद लगातार जनसंपर्क कर रहे हैं। अब राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही तैर रहा है कि क्या प्रशांत किशोर अपने अकेले के दम पर भाजपा की इस विशाल चुनावी मशीनरी और उसके दिग्गजों के चक्रव्यूह को भेद पाएंगे? यही सवाल इस उपचुनाव की लड़ाई को बिहार की अब तक की सबसे दिलचस्प राजनीतिक भिड़ंत बना रहा है।





