भारतीय क्रिकेट टीम के नवनियुक्त कार्यवाहक कप्तान श्रेयस अय्यर के नेतृत्व में नए युग की शुरुआत वैसी नहीं रही जैसी उम्मीद की जा रही थी। दो मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के पहले बेहद रोमांचक मुकाबले में मेजबान आयरलैंड ने पासा पलटते हुए विश्व विजेता भारत को 34 रनों के बड़े अंतर से करारी शिकस्त देकर क्रिकेट जगत को स्तब्ध कर दिया। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में यह पहला मौका है जब आयरिश टीम ने किसी भी प्रारूप (Format) में टीम इंडिया के खिलाफ जीत का स्वाद चखा है। इस ऐतिहासिक और सनसनीखेज जीत के साथ ही मेजबान टीम ने इस संक्षिप्त श्रृंखला में 1-0 की अजेय बढ़त बना ली है। मैच में टॉस जीतकर पहले फील्डिंग करने का भारतीय टीम का फैसला शुरुआत में सही साबित होता दिख रहा था, लेकिन आयरलैंड के मध्यक्रम ने शानदार वापसी करते हुए 20 ओवरों में 9 विकेट खोकर 182 रनों का मजबूत स्कोर खड़ा किया, जिसके जवाब में भारतीय बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई और पूरी टीम 18.5 ओवरों में महज 148 रनों पर सिमट गई।

शुरुआती झटकों के बाद टकर और डेलानी का पलटवार, हर्षित राणा की गेंदबाजी रही शानदार

पहले बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किए जाने के बाद आयरलैंड की शुरुआत बेहद आक्रामक रही, लेकिन भारतीय तेज गेंदबाजों ने जल्द ही मैच का रुख अपनी तरफ मोड़ लिया। युवा सनसनी हर्षित राणा और अनुभवी अर्शदीप सिंह ने अपनी धारदार गेंदबाजी के दम पर मेजबान टीम के शीर्ष क्रम को ध्वस्त करते हुए केवल 32 रनों के कुल योग पर 3 बड़े विकेट चटकाकर आयरलैंड को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया था।

इसके बाद क्रीज पर उतरे आयरिश कप्तान लॉर्कन टकर और खतरनाक बल्लेबाज गैरेथ डेलानी ने मोर्चा संभाला। दोनों बल्लेबाजों ने भारतीय स्पिनर्स और तेज गेंदबाजों के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए एक बड़ी और सूझबूझ भरी साझेदारी की। कप्तान टकर ने मोर्चे से अगुवाई करते हुए 36 गेंदों में 5 चौकों और 2 गगनचुंबी छक्कों की मदद से 50 रनों की बेहतरीन अर्धशतकीय पारी खेली। वहीं, दूसरे छोर पर डेलानी ने 31 गेंदों में 49 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेली, हालांकि वे अपने अर्धशतक से महज एक रन से चूक गए। पारी के अंतिम क्षणों में जॉर्ज डॉकरेल ने सिर्फ 10 गेंदों में 19 रनों का विस्फोटक योगदान देकर टीम के स्कोर को 182 तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। भारत की तरफ से हर्षित राणा सबसे सफल गेंदबाज साबित हुए, जिन्होंने अपने 4 ओवर के कोटे में 24 रन देकर 3 विकेट झटके, जबकि अर्शदीप सिंह और अक्षर पटेल के खाते में 2-2 विकेट आए।

अभिषेक शर्मा का रिकॉर्डतोड़ अर्धशतक बेकार, शिवम दुबे ने रचा इतिहास

जीत के लिए 183 रनों के चुनौतीपूर्ण लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम ने तेज शुरुआत तो की, लेकिन उनके विकेट ताश के पत्तों की तरह गिरते रहे। इन-फॉर्म बल्लेबाज संजू सैमसन, ईशान किशन और खुद कप्तान श्रेयस अय्यर सस्ते में पवेलियन लौट गए, जिससे टीम गहरे संकट में आ गई। संकट की इस घड़ी में सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने अकेले दम पर संघर्ष जारी रखा और विरोधी गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाते हुए महज 19 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। उन्होंने 20 गेंदों में 50 रनों की अपनी तूफानी पारी के दौरान एक बड़ा कीर्तिमान भी अपने नाम कर लिया। वे अब आयरलैंड के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय में तीसरा सबसे तेज अर्धशतक जड़ने वाले दुनिया के बल्लेबाज बन गए हैं। इस सूची में उनसे आगे सिर्फ स्टीफन मायबर्ग (17 गेंद) और लिटन दास (18 गेंद) हैं, जबकि फिल सॉल्ट ने भी यह मुकाम 20 गेंदों में हासिल किया था।

अभिषेक शर्मा के आउट होते ही भारतीय मध्यक्रम पूरी तरह ताश के पत्तों की तरह ढह गया। तिलक वर्मा, शिवम दुबे और निचला क्रम कोई भी बड़ी या उपयोगी साझेदारी करने में नाकाम रहा, जिसके चलते पूरी टीम 148 रनों पर ऑलआउट हो गई। हालांकि, इस निराशाजनक हार के बीच ऑलराउंडर शिवम दुबे ने एक बड़ा व्यक्तिगत मील का पत्थर हासिल किया। वह गेंदों का सामना करने के लिहाज से भारत के लिए सबसे तेज 1000 टी20 अंतरराष्ट्रीय रन बनाने वाले तीसरे सबसे तेज भारतीय बल्लेबाज बन गए हैं। उन्होंने यह उपलब्धि केवल 648 गेंदों में हासिल की। इस एलीट लिस्ट में अभिषेक शर्मा (528 गेंद) पहले और स्टार बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव (573 गेंद) दूसरे स्थान पर काबिज हैं। आयरलैंड की ओर से मैट हॉलार्ड ने बेहतरीन स्पेल डालते हुए 3 विकेट झटके, जबकि अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेल रहे भारतीय मूल के जय मूंद्रा ने 2 विकेट लेकर भारत की कमर तोड़ दी।

अय्यर की कप्तानी की खराब शुरुआत, वैभव सूर्यवंशी को अभी भी मौके का इंतजार

श्रेयस अय्यर के लिए भारत के नियमित टी20 कप्तान के रूप में यह सफर बेहद निराशाजनक रहा। वे न केवल कप्तानी के मोर्चे पर रणनीतिक रूप से विफल दिखे, बल्कि बल्ले से भी टीम को संकट से उबारने में नाकाम रहे। दूसरी ओर, मैच से पहले सुर्खियों में रहे 15 वर्षीय युवा बल्लेबाजी सनसनी वैभव सूर्यवंशी के अंतरराष्ट्रीय पदार्पण (डेब्यू) का इंतजार इस मुकाबले में भी खत्म नहीं हो सका, क्योंकि टीम प्रबंधन ने उन्हें अंतिम ग्यारह (Playing-11) में शामिल न करके बेंच पर ही बैठाए रखने का फैसला किया, जिसकी खेल समीक्षकों द्वारा काफी आलोचना भी की जा रही है। अब देखना होगा कि अगले करो या मरो वाले मैच में टीम इंडिया किस रणनीति के साथ वापसी करती है।