नई दिल्ली: भारत की सैन्य तैयारियों को और अधिक धार देने के लिए आज रक्षा मंत्रालय की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। रणनीतिक और रक्षा परियोजनाओं के नजरिए से इस बैठक को बेहद खास माना जा रहा है। इस उच्च स्तरीय बैठक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें नवनियुक्त चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल राजा सुब्रमणि, थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ और नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन पहली बार अपने नए पदों पर कार्यभार संभालने के बाद एक साथ शामिल होंगे। कई महीनों के अंतराल के बाद आयोजित हो रही इस बैठक में तीनों सेनाओं की मारक क्षमता और निगरानी तंत्र को आधुनिक बनाने वाले कई महाप्रस्तावों पर अंतिम मुहर लग सकती है।
सेना को मिलेंगे 'मेड इन इंडिया' मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल
बैठक के मुख्य एजेंडे में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित 'मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल' (MP-ATGM) परियोजना को हरी झंडी मिलना लगभग तय माना जा रहा है। करीब 2600 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस स्वदेशी परियोजना के अंतर्गत भारतीय सेना को 100 अत्याधुनिक लॉन्चर, 2300 घातक मिसाइलें और 5 सिम्युलेटर सौंपे जाएंगे। इस पूरी परियोजना के तहत मिसाइलों का व्यावसायिक उत्पादन सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी 'भारत डायनामिक्स लिमिटेड' (BDL) द्वारा किया जाएगा, जो 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को बड़ी मजबूती देगा।
हैमर प्रिसिजन गाइडेड मिसाइलों से लैस होंगे राफेल और तेजस
भारतीय वायुसेना और नौसेना की हवाई ताकत को अभूतपूर्व स्तर पर ले जाने के लिए बैठक में 600 'हैमर प्रिसिजन गाइडेड मिसाइल' खरीदने के प्रस्ताव पर गहन विचार-विमर्श होगा। लगभग 2400 करोड़ रुपये की इस महत्वपूर्ण डील के तहत इन अचूक मिसाइलों का निर्माण फ्रांस की प्रसिद्ध सैफरन कंपनी और भारत के 'इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड' के आपसी तकनीकी सहयोग से घरेलू स्तर पर (भारत में ही) किया जाना है। इन घातक मिसाइलों को वायुसेना के राफेल व स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमानों में एकीकृत किया जाएगा, जबकि नौसेना इन्हें अपने लड़ाकू विमान राफेल-एम (Rafale-M) के लिए उपयोग में लाएगी।
वर्बा एयर डिफेंस सिस्टम से अभेद्य होगी देश की हवाई सुरक्षा
देश की सीमाओं की सुरक्षा और थलसेना की हवाई रक्षा प्रणाली को अपग्रेड करने के लिए 'वर्बा वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम' (VSHORADS) की खरीद को भी आज मंजूरी मिलने की प्रबल संभावना है। यह आधुनिक मिसाइल प्रणाली पहले से उपयोग की जा रही एयर डिफेंस प्रणालियों का एक बेहद उन्नत और अपग्रेड संस्करण है। इसकी मदद से दुश्मन के लड़ाकू हेलीकॉप्टरों, मानव रहित ड्रोनों और बहुत कम ऊंचाई पर उड़ने वाले घुसपैठिए विमानों को पलक झपकते ही हवा में नेस्तनाबूद किया जा सकेगा। निजी क्षेत्र की रक्षा कंपनी 'अदाणी डिफेंस' द्वारा इस उन्नत प्रणाली का उत्पादन किया जाएगा।
ड्रोन रोधी और आधुनिक प्रणालियों से बढ़ेगी तीनों सेनाओं की ताकत
इन बड़े मिसाइल सौदों के अलावा बैठक में सीमाओं पर घुसपैठ रोकने के लिए आधुनिक ड्रोन रोधी प्रणालियों (एंटी-ड्रोन सिस्टम) और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने वाले अन्य संवेदनशील प्रस्तावों पर भी बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आज की इस बैठक में इन सभी महत्वपूर्ण प्रस्तावों को 'एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी' (AoN) यानी सैद्धांतिक मंजूरी मिल जाती है, तो यह भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना की रणनीतिक मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा और साथ ही साथ घरेलू रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचेगा।





