पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को दोहराते हुए एक बेहद कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि राज्य में जो भी व्यक्ति गलत और अनैतिक रास्तों को अपनाकर रातों-रात अमीर बनने का प्रयास करेगा, उसके लिए जेल के दरवाजे खुले हैं। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि भ्रष्टाचार के मामले में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा और अवैध रूप से संपत्ति अर्जित करने वालों के विरुद्ध कानून के तहत सबसे कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
कानून के दायरे में सब, सतर्कता के लिए महाअभियान की शुरुआत
मुख्यमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि सत्ता के किसी भी गलियारे या प्रशासनिक तंत्र में बैठा कोई भी व्यक्ति कानून से बड़ा नहीं है, चाहे वह कोई बड़ा नेता हो, मंत्री हो, विधायक हो या फिर वरिष्ठ अधिकारी। वह राजधानी में आयोजित बिहार सतर्कता जागरूकता दिवस के मुख्य समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस विशेष अवसर पर उन्होंने राज्य के इतिहास में पहली बार आयोजित हो रहे 'बिहार सतर्कता जागरूकता सप्ताह' का औपचारिक रूप से उद्घाटन किया। पूरे प्रदेश में सात दिनों तक चलने वाले इस व्यापक अभियान का मुख्य उद्देश्य स्वतंत्रता के आठ दशकों बाद भ्रष्टाचार के उन्मूलन हेतु जन-जन तक जागरूकता फैलाना है।
केंद्र की तर्ज पर बिहार में पारदर्शी शासन का संकल्प
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में एक पारदर्शी, ईमानदार और जवाबदेह शासन व्यवस्था को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। केंद्र सरकार की इसी पारदर्शी सोच और नीति को आगे बढ़ाते हुए बिहार सरकार भी राज्य के भीतर भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा जन-आंदोलन खड़ा कर रही है। सरकार का मानना है कि जब तक आम नागरिक इस मुहिम से पूरी तरह नहीं जुड़ेगा, तब तक इस सामाजिक और प्रशासनिक बुराई को पूरी तरह जड़ से खत्म करना संभव नहीं होगा।
प्रशासनिक व्यवस्था का मुख्य आधार बनेगा ट्रिपल-टी सिद्धांत
शासन को और अधिक उत्तरदायी बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने एक नए प्रशासनिक फॉर्मूले की घोषणा की। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार अब टेक्नोलॉजी (तकनीक), ट्रांसपेरेंसी (पारदर्शिता) और ट्रस्ट (जन-विश्वास) के 'ट्रिपल-टी' सिद्धांत पर पूरी व्यवस्था को संचालित करेगी। सरकारी कामकाज में आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों के अधिकतम उपयोग से कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी, जिससे सीधे तौर पर सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचेगा और व्यवस्था के प्रति जनता का भरोसा और मजबूत होगा।
आंतरिक जांच एजेंसियों को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने सतर्कता विभाग और उसकी सहयोगी इकाइयों द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि इस मुहिम को और अधिक तेज करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बिहार के पास वर्तमान में विजिलेंस, स्पेशल विजिलेंस यूनिट और आर्थिक अपराध इकाई जैसी बेहद सक्षम और विशेषज्ञ जांच एजेंसियां मौजूद हैं। राज्य सरकार इन आंतरिक एजेंसियों को ढांचागत और तकनीकी रूप से इतना सुदृढ़ और प्रभावी बनाएगी कि भविष्य में किसी भी मामले की जांच के लिए बाहरी या केंद्रीय जांच एजेंसियों के हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता ही न पड़े।





