रायगढ़| रायगढ़ शहर तथा इसके समीपवर्ती क्षेत्रों में विकसित की जा रही कॉलोनियों में नियमानुसार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) एवं निम्न आय वर्ग (LIG) के लिए भूमि व भूखंड सुरक्षित रखे जाने के मामले में जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए विस्तृत जांच प्रारंभ कर दी है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के निर्देशानुसार उपविभागीय अधिकारी (एसडीएम) कार्यालय ने खैरपुर, पंडरीपानी पूर्व, बड़े अतरमुड़ा तथा जोरापाली क्षेत्र की कॉलोनियों से संबद्ध पांच प्रकरणों में नोटिस जारी किए हैं। प्रशासन ने संबंधित कॉलोनाइजरों को आगामी 22 सितंबर को पूर्ण अभिलेखों के साथ एसडीएम कार्यालय में उपस्थित होने का कड़ा निर्देश दिया है।

आरक्षित भूखंडों की भौतिक स्थिति का होगा सत्यापन

जांच प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कॉलोनी विकास के दौरान आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग हेतु निर्धारित 15 प्रतिशत भूमि तथा निम्न आय वर्ग हेतु न्यूनतम 10 प्रतिशत भूखंडों का नियमपूर्वक आवंटन किया गया है अथवा नहीं। प्रशासन इस बार केवल स्वीकृत मानचित्रों व लाइसेंसों तक ही जांच सीमित नहीं रखेगा, बल्कि धरातल पर उपलब्ध आरक्षित भूमि और निर्मित भूखंडों की वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन भी करेगा।

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अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) महेश शर्मा ने बताया कि जिलाधीश कार्यालय से प्राप्त निर्देशों के अनुपालन में यह कार्रवाई संचालित की जा रही है। जांच के अंतर्गत निम्नलिखित भू-खंडों पर विकसित कॉलोनियों के रिकॉर्ड तलब किए गए हैं:

  • खैरपुर: 7.259 हेक्टेयर भूमि

  • पंडरीपानी पूर्व: 2.848 हेक्टेयर भूमि

  • बड़े अतरमुड़ा: 19,240 वर्गमीटर एवं 84,038 वर्गमीटर भूमि

  • जोरापाली: 2.238 हेक्टेयर भूमि

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 22 सितंबर को तय समय पर यदि संबंधित कॉलोनाइजर रिकॉर्ड प्रस्तुत करने में विफल रहते हैं, तो उनके विरुद्ध नियमानुसार दंडात्मक वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।