मैं अपने पिता की इकलौती बेटी थी। वे मुझे बहुत प्यार करते थे। अक्सर कहते थे बेटी तुम्हें बड़े ही धूमधाम से विदा करूंगा। मेरी शादी के कई अरमान उन्होंने देखे थे, लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था। 28 जून को पापा संतोष चढ़ार मेरी शादी के कार्ड...
Published on 03/07/2021 12:08 PM





