वाशिंगटन। अमेरिकी संसद के 50 से अधिक डेमोक्रेटिक सांसदों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। सांसदों का दावा है कि क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) से जुड़े वैश्विक समझौतों के माध्यम से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और वाणिज्य मंत्री हावर्ड लटनिक के परिजनों के व्यावसायिक हितों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंच सकता है। इसके साथ ही अमेरिकी करदाताओं (टैक्सपेयर्स) की गाढ़ी कमाई के जोखिम में पड़ने की आशंका जताई गई है।
चार प्रमुख प्रशासनिक अधिकारियों को सांसदों का पत्र
सांसदों के एक समूह ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, वाणिज्य सचिव हावर्ड लटनिक और वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट को एक साझा पत्र प्रेषित किया है। इस पत्र में कजाकिस्तान में अमेरिकी समर्थन से किए जा रहे खनिज समझौते का विशेष उल्लेख किया गया है। मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए सांसदों ने आरोप लगाया है कि पर्याप्त पारदर्शिता और निगरानी के बिना किए जा रहे ये निवेश और ऋण गारंटियां सीधे तौर पर पक्षपात और स्वार्थ को बढ़ावा दे सकती हैं।
करदाताओं के धन और वित्तीय व्यवस्था पर बढ़ता जोखिम
पत्र में चिंता व्यक्त की गई है कि ये समझौते डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन (DFC) तथा एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक के माध्यम से अरबों डॉलर के ऋण और गारंटियों को मंजूरी दे सकते हैं। इसके अतिरिक्त संघीय सरकार द्वारा खनन व प्रसंस्करण से जुड़ी कंपनियों में सीधे इक्विटी निवेश की योजना है। सांसदों का तर्क है कि यदि ये परियोजनाएं सफल रहती हैं तो निजी कंपनियां पूरा मुनाफा अपने पास रखेंगी, परंतु विफल होने की स्थिति में पूरा वित्तीय नुकसान अमेरिकी जनता को सहना पड़ेगा।
कांगो, जाम्बिया और अन्य देशों के समझौतों पर उठे सवाल
डेमोक्रेटिक सांसदों ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और जाम्बिया के साथ हुए करारों पर भी सख्त आपत्ति दर्ज कराई है। आरोप है कि जाम्बिया पर दबाव बनाने के लिए एचआईवी रोधी दवाओं और अन्य सहायता को रोकने की धमकियां दी गईं। वहीं कांगो में खनन क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए अमेरिकी सहायता प्राप्त अर्धसैनिक बलों के उपयोग पर चिंता जाहिर की गई है। अर्जेंटीना, इक्वाडोर, कंबोडिया और बांग्लादेश के साथ व्यापार करारों में पर्यावरण, श्रम और मानवाधिकारों से जुड़ी बाध्यकारी शर्तें हटाए जाने का भी विरोध किया गया है।
भारतीय मूल के सांसदों का समर्थन और प्रशासन से 10 तीखे प्रश्न
नेचुरल रिसोर्सेज कमेटी के रैंकिंग सदस्य जारेड हफमैन, लिंडा सांचेज और जोनाथन जैक्सन के नेतृत्व में भेजे गए इस पत्र पर रो खन्ना और श्री थानेदार सहित भारतीय मूल के सांसदों ने भी हस्ताक्षर किए हैं। सांसदों ने स्पष्ट किया कि वे चीन पर निर्भरता घटाने और स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के समर्थन में हैं, लेकिन यह प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। इस संबंध में उन्होंने प्रशासन से 10 प्रमुख बिंदुओं पर जवाब मांगा है, जिनमें मानवाधिकार संरक्षण, पर्यावरणीय मूल्यांकन, करदाताओं की सुरक्षा और हितों के टकराव जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं।





