मुंबई (महाराष्ट्र): आगामी गणेशोत्सव, नवरात्रोत्सव और माघी गणेशोत्सव के दौरान समुद्र में प्रतिमा विसर्जन करने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सहूलियत को सर्वोपरि रखते हुए मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने एक बेहद महत्वपूर्ण और सराहनीय कदम उठाया है। शहर के प्राकृतिक विसर्जन स्थलों पर समुद्र के भीतर ओट यानी निम्न ज्वार की सटीक रेखा को दर्शाने के लिए विशेष 'मरीन नेविगेशन बॉय' (त तैरते मार्गदर्शक चिन्ह) स्थापित किए जाएंगे। इन तैरते हुए मार्करों के साथ सुरक्षित मूरिंग सिस्टम और आधुनिक सौर ऊर्जा (सोलर) से जगमगाने वाली लाइटें भी लगाई जाएंगी।

मुंबई महानगर क्षेत्र में समुद्र के तटों पर कुल 43 स्थानों पर गणेश व अन्य प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। इनमें से चिन्हित किए गए 21 सबसे प्रमुख विसर्जन स्थलों पर इस आधुनिक व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जा रहा है। इस पूरी परियोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए 'लिटमस मरीन इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड' नामक कंपनी का चयन किया गया है, जिस पर आगामी तीन साल के रखरखाव (मेंटेनेंस) समेत लगभग 2 करोड़ 22 लाख रुपये की कुल लागत आएगी।

रात के समय भी स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे बॉय

पालिका के वरिष्ठ अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, समुद्र में विसर्जन गतिविधियों के दौरान श्रद्धालुओं और वहां तैनात पालिका कर्मियों को ओट की सीमा रेखा पहचानने में भारी आसानी होगी। समुद्र में स्थापित किए जाने वाले इन तैरते चिन्हों के ऊपर सोलर लाइटें लगाई जाएंगी, जिससे वे रात्रि के अंधकार में भी बिल्कुल स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे।

अक्सर समुद्र की तीव्र लहरों के कारण इस तरह के तैरते उपकरण अपनी जगह से बहकर दूर चले जाते हैं, इस समस्या से निपटने के लिए इन्हें मजबूत मूरिंग व्यवस्था के माध्यम से समुद्र की तली (बॉटम) से पूरी तरह सुरक्षित रूप से बांधा जाएगा। इससे विसर्जन के दौरान एक निर्धारित और सुरक्षित क्षेत्र की पहचान करने में बहुत मदद मिलेगी।

बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में हो रही है कार्रवाई

मुंबई में पारदर्शी और पर्यावरण के अनुकूल मूर्ति विसर्जन को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा वर्ष 2024 में दिए गए कड़े निर्देशों और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की संशोधित मार्गदर्शिका (गाइडलाइन) के अनुसार महानगरपालिका ने यह कार्रवाई शुरू की है। इसके तहत अब मूर्तियों का विसर्जन समुद्र में ओट और भरती की रेखा के बीच स्थित गैर-पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्र (Non-Ecologically Sensitive Zone) के भीतर ही करने के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।

इस दिशा में पूर्व में गिरगांव चौपाटी पर प्रायोगिक (पायलट प्रोजेक्ट) तौर पर ऐसी ही एक व्यवस्था सफलतापूर्वक स्थापित की गई थी, जिसके सकारात्मक परिणामों को देखते हुए अब इसे मुंबई के सभी 21 प्रमुख समुद्री विसर्जन स्थलों तक विस्तारित किया जा रहा है।

उत्सव संपन्न होने के बाद हटा लिए जाएंगे ये उपकरण

महानगरपालिका प्रशासन के स्पष्टीकरण के अनुसार, समुद्र में लगाए जाने वाले ये मरीन नेविगेशन बॉय स्थायी रूप से स्थापित नहीं किए जाएंगे। इन्हें केवल विभिन्न उत्सवों की विसर्जन अवधि के दौरान ही अस्थायी तौर पर समुद्र में लगाया जाएगा।

गणेशोत्सव, नवरात्रोत्सव या माघी गणेशोत्सव जैसे प्रमुख पर्व समाप्त होने के बाद इन्हें सुरक्षित रूप से पानी से बाहर निकाल लिया जाएगा और आगामी उत्सवों के दौरान इन्हें दोबारा स्थापित किया जाएगा। इस अभिनव व्यवस्था से विसर्जन के दौरान हुजूम के बीच श्रद्धालुओं और प्रशासनिक अमले को समुद्र में सुरक्षित क्षेत्र की पहचान करने में भारी सुविधा मिलेगी, जिससे पूरी विसर्जन प्रक्रिया को और अधिक व्यवस्थित, अनुशासित और दुर्घटनामुक्त बनाया जा सकेगा।