उज्जैन। हिंदू धर्म में सावन मास को देवाधिदेव महादेव की आराधना का सबसे पावन समय माना गया है। इसी पवित्र महीने में आने वाली अमावस्या को हरियाली अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व प्रकृति के प्रति आभार जताने और पितरों का तर्पण करने के लिए बेहद खास माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। उज्जैन के पंडित आनंद भारद्वाज के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति सामान्य कर्म या अनुष्ठान न कर पाए, तो कुछ विशेष पौधे लगाकर भी पितरों को प्रसन्न कर सकता है।

सावन हरियाली अमावस्या की तिथि और शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन मास की अमावस्या तिथि 11 अगस्त 2026, मंगलवार को रात 1 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर 12 अगस्त 2026, बुधवार को रात 11 बजकर 7 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर इस बार हरियाली अमावस्या का पर्व 12 अगस्त को मनाया जाएगा।

पितृ दोष मुक्ति के लिए पीपल का पौधा

हरियाली अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करना और पौधे लगाना बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन मंदिर या किसी सार्वजनिक स्थल पर पीपल का पौधा लगाने से पितृ दोष से राहत मिलती है और पितर प्रसन्न होकर साधक को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि इस उपाय से सात जन्मों तक पितरों की विशेष कृपा बनी रहती है।

आर्थिक समृद्धि और मां लक्ष्मी की कृपा के उपाय

जो लोग लंबे समय से आर्थिक तंगी या परेशानियों से जूझ रहे हैं, उन्हें हरियाली अमावस्या के पावन अवसर पर तुलसी, आंवला, केला या बेल का पौधा लगाना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, इन पौधों को लगाने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में हमेशा सुख-समृद्धि और बरकत बनी रहती है।

संतान प्राप्ति और करियर में सफलता के विशेष उपाय

संतान सुख से वंचित दंपत्तियों के लिए हरियाली अमावस्या के दिन नीम, बेल, नागकेशर और अश्वगंधा के पौधे लगाना अत्यंत फलदायी माना गया है। इससे पितृ देव प्रसन्न होते हैं और संतान प्राप्ति का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। इसके अलावा, जो लोग लगातार मेहनत के बावजूद सफलता से दूर हैं, वे इस दिन नीम और अन्य छायादार वृक्ष लगाकर सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि कर सकते हैं।