मुंबई। डेनमार्क की दिग्गज शराब निर्माता कंपनी कार्ल्सबर्ग ए/एस (Carlsberg A/S) भारतीय शेयर बाजार में कदम रखने की बड़ी तैयारी कर रही है। कंपनी ने अपनी भारतीय इकाई के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ (IPO) के लिए गोपनीय तरीके (कॉन्फिडेंशियल रूट) से ड्राफ्ट पेपर जमा करा दिए हैं। इस प्रस्तावित आईपीओ के जरिए कंपनी बाजार से करीब 70 करोड़ डॉलर यानी लगभग 6,600 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। इस लिस्टिंग को भारतीय कॉर्पोरेट जगत और शराब उद्योग के लिए एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।

गोपनीय रूट से दाखिल किए शुरुआती दस्तावेज

मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कार्ल्सबर्ग ने इस आईपीओ के लिए 'कॉन्फिडेंशियल प्री-फाइलिंग' का रास्ता चुना है। यह विशेष प्रक्रिया कंपनियों को अपने संवेदनशील व्यावसायिक विवरण, वित्तीय आंकड़े और जोखिमों को प्रतिस्पर्धी कंपनियों से तब तक गोपनीय रखने की अनुमति देती है, जब तक कि लिस्टिंग पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता। मानक प्रक्रिया (स्टैंडर्ड DRHP) के विपरीत, यह दस्तावेज तुरंत सार्वजनिक नहीं होता है। इसके तहत अगर बाजार की स्थितियां अनुकूल न हों, तो कंपनी बिना किसी जानकारी को सार्वजनिक किए अपने ड्राफ्ट को वापस भी ले सकती है। माना जा रहा है कि इस लिस्टिंग में पूरी हिस्सेदारी केवल 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) के रूप में हो सकती है, जिसके तहत मौजूदा प्रमोटर्स अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे।

देश की दूसरी सबसे बड़ी शराब निर्माता कंपनी

कार्ल्सबर्ग इंडिया घरेलू बाजार में एक बेहद मजबूत पकड़ रखती है और यह देश की दूसरी सबसे बड़ी शराब निर्माता कंपनी है। भारतीय बाजार के करीब 22 प्रतिशत हिस्से पर इसका सीधा कब्जा है। कंपनी ने भारत में अपने परिचालन की शुरुआत साल 2007 में की थी और वर्तमान में यह देश भर में कुल 14 ब्रुअरीज (शराब बनाने के कारखाने) का संचालन कर रही है। इनमें से 8 कारखानों पर कंपनी का अपना मालिकाना हक है, जबकि 6 इकाइयां कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग के आधार पर चलाई जा रही हैं। आपको बता दें कि वैश्विक स्तर पर कार्ल्सबर्ग समूह का इतिहास काफी पुराना है और इसकी शुरुआत साल 1847 में हुई थी।

दिग्गज वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर तैयारी

इस बड़े आईपीओ को अमलीजामा पहनाने के लिए कार्ल्सबर्ग वैश्विक और घरेलू स्तर के बड़े मर्चेंट बैंकर्स के साथ मिलकर काम कर रही है। इनमें कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी, जेपी मॉर्गन चेस एंड कंपनी और सिटीग्रुप इंक की भारतीय इकाइयां मुख्य रूप से शामिल हैं। कंपनी के पोर्टफोलियो में कार्ल्सबर्ग, टुबोर्ग, क्रोननबर्ग 1664, ग्रिमबर्गेन, सोमरस्बी और होल्स्टन जैसे कई लोकप्रिय और स्थापित ब्रांड्स शामिल हैं। हालांकि, बाजार के जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में बाजार की स्थितियों को देखते हुए इस आईपीओ के आकार, संरचना और पेश किए जाने के समय में बदलाव की संभावना बनी हुई है।

बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा

भारतीय शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों में कार्ल्सबर्ग इंडिया की सबसे करीबी और सीधी टक्कर यूनाइटेड ब्रुअरीज लिमिटेड से मानी जाती है। कार्ल्सबर्ग के इस कदम के बाद इस सेक्टर में हलचल काफी तेज हो गई है। चर्चा यह भी है कि एब्सोल्यूट वोदका और चिवास रीगल स्कॉच व्हिस्की जैसी मशहूर ब्रांड्स बनाने वाली एक और दिग्गज कंपनी, पेरनोड रिकार्ड एसए (Pernod Ricard SA) भी अपने भारतीय कारोबार को शेयर बाजार में लिस्ट कराने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार कर रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस सेक्टर में निवेशकों को निवेश के कई बड़े और नए विकल्प मिल सकते हैं।