रायपुर: राजधानी के नकटी गांव में हाल ही में अवैध कब्जा हटाने पहुंचे प्रशासनिक अमले और पुलिस टीम को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। अतिक्रमण हटाने की इस मुहिम के दौरान गांव में जबरदस्त बवाल और झड़प की स्थिति बन गई। इस हंगामे को लेकर माना थाना पुलिस ने सरकारी काम में बाधा डालने और उपद्रव करने वाले अज्ञात ग्रामीणों के खिलाफ बलवा सहित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है और मामले की सघन जांच शुरू कर दी है।

सरकारी कर्मचारियों पर हमले और काम रोकने का आरोप

मिली जानकारी के मुताबिक, नकटी गांव में प्रस्तावित 'विधायक कॉलोनी' के निर्माण के लिए सोमवार को प्रशासन की टीम बुलडोजर लेकर पहुंची थी। कार्रवाई शुरू होते ही वहां मौजूद स्थानीय ग्रामीणों और शासकीय अधिकारियों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जिसने देखते ही देखते बड़े विवाद का रूप ले लिया। आरोप है कि आक्रोशित ग्रामीणों ने सरकारी कर्मचारियों पर पथराव और हमला किया, जिससे सरकारी काम में भारी रुकावट आई।

वीडियो और तस्वीरों से होगी उपद्रवियों की पहचान

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि माना थाना पुलिस ने इस हिंसक विरोध को गंभीरता से लिया है। मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों द्वारा बनाए गए वीडियो फुटेज, तस्वीरों और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर हुड़दंग करने वाले लोगों की पहचान की जा रही है। पुलिस का दावा है कि कानून हाथ में लेने वाले किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।

भारी सुरक्षा के बीच ढहाए गए 80 आशियाने

परियोजना का विवरण: विधायक कॉलोनी के निर्माण के लिए प्रशासन ने नकटी गांव में करीब 80 मकानों को मलबे में तब्दील कर दिया। बताया जा रहा है कि इनमें से 32 मकान प्रधानमंत्री आवास योजना और इंदिरा आवास योजना के तहत बने हुए थे।

इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम देने के लिए रविवार रात से ही पूरे नकटी गांव को छावनी में बदल दिया गया था। किसी भी बड़ी अनहोनी या हिंसक झड़प से निपटने के लिए मौके पर 1,000 से अधिक पुलिस जवानों और भारी सुरक्षा बल की तैनाती की गई थी।