कोच्चि : पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने केरल उच्च न्यायालय को बताया है कि उन्होंने न तो व्यक्तिगत तौर पर और न ही अपनी दिवंगत पत्नी सुनंदा पुष्कर के बेटे या फिर किसी और रिश्तेदार के साथ संयुक्त तौर पर सुनंदा की कोई संपत्ति हासिल की है क्योंकि उनकी चल एवं अचल संपत्तियों का अनुमान अभी नहीं लगाया जा सका है। एक याचिका के जवाब में लिखित तौर पर रखे गए अपने पक्ष में कांग्रेस सांसद ने अदालत को बताया कि यह ‘सरासर गलत’ है कि उन्होंने हिंदू उत्तराधिकार कानून के प्रावधानों का फायदा उठाकर अपनी पत्नी की संपत्ति का अच्छा-खासा हिस्सा अपने नाम कर लिया। थरूर ने कहा कि यह आरोप इसलिए गलत है क्योंकि सुनंदा कनाडाई नागरिक थी।

याचिका में मांग की गई है कि थरूर के निर्वाचन को रद्द कर दिया जाए क्योंकि उन्होंने लोकसभा चुनाव के समय दाखिल हलफनामे में कथित तौर पर यह नहीं बताया था कि उन्होंने अपनी पत्नी की संपत्ति हासिल की है। कांग्रेस नेता ने कहा कि तिरूवनंतपुरम सीट से नामांकन दाखिल करते वक्त उन्होंने अपनी दिवंगत पत्नी सुनंदा की न तो कोई चल संपत्ति और न ही कोई अचल संपत्ति हासिल की। थरूर ने कहा कि उन्होंने न तो व्यक्तिगत तौर पर और न ही सुनंदा के बेटे या किसी और रिश्तेदार के साथ मिलकर संयुक्त तौर पर संपत्ति हासिल की। सुरेश कुमार की याचिका पर दाखिल अपने जवाब में थरूर ने कहा, ‘दिवंगत सुनंदा की चल एवं अचल संपत्तियों का अनुमान अभी नहीं लगाया जा सका है और उनकी संपत्ति पर हक किसे मिलेगा ये भी अभी निश्चित नहीं है।’

थरूर ने कहा कि सुनंदा पुष्कर की संपत्तियों का ब्योरा न देने के पीछे उनकी कोई दुर्भावना नहीं थी और न ही वह जानकारी छुपाना चाहते थे। ब्योरा सिर्फ इसलिए नहीं दिया गया क्योंकि वह उस वक्त जीवित नहीं थी।