मुंबई| भारत का सबसे बड़ा कारोबारी घराना टाटा संस लिमिटेड अब एक ऐतिहासिक बदलाव की ओर जा रहा है। टाटा ग्रुप अपने कॉर्पोरेट गवर्नेंस को बेहतर बनाने में मदद करने के लिए एक प्रमुख कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति करना चाहता है। यानी अब ग्रुप में चेयरमैन और CEO अलग-अलग होंगे।
टाटा ग्रुप 153 साल पुराना है
 प्रस्तावित प्लान के तहत, नए CEO 153 साल पुराने टाटा के बिजनेस साम्राज्य का मार्गदर्शन करेंगे। जबकि चेयरमैन मॉनिटरिंग अधिकारी की भूमिका में रहेंगे। हालांकि इस फैसले में रतन टाटा की मंजूरी सबसे महत्वपूर्ण है। 83 साल के रतन टाटा अभी टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन हैं।
चंद्रशेखरन का कार्यकाल फरवरी 2022 में खत्म होगा
टाटा संस के मौजूदा चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन का कार्यकाल फरवरी 2022 में खत्म होगा। उन्हें सेवा विस्तार देने पर विचार किया जा रहा है। टाटा स्टील सहित टाटा समूह की विभिन्न कंपनियों के प्रमुखों का CEO पद के लिए मूल्यांकन भी किया जा रहा है। इस पर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। इस योजना में बदलाव भी हो सकता है।
साइरस मिस्त्री के विवाद से लिया सबक
 CEO वाला प्रस्ताव साइरस पी मिस्त्री के साथ साल भर की कानूनी लड़ाई जीतने के कई महीने बाद आया है। मिस्त्री ग्रुप के चेयरमैन थे। उन पर ग्रुप में मिस मैनेजमेंट का आरोप लगाया गया। 2016 में उन्हें पद से हटा दिया गया था। इस प्रस्तावित प्लान से ग्रुप के लिए भविष्य का चार्ट तैयार करने में मदद मिल सकती है।
टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन हैं रतन टाटा
टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन के रूप में रतन टाटा की जगह कौन लेगा, इस बारे में कुछ साफ नहीं है। टाटा ट्रस्ट के पास टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी का 66% मालिकाना हक है। ग्रुप के एक नए CEO को कई चुनौतियों से निपटना होगा। टाटा स्टील 10 अरब डॉलर के कर्ज को कम करने की कोशिश कर रही है। जबकि टाटा मोटर्स लगातार तीन साल से घाटे में है।