
जयपुर । राजस्थान में हुए पंचायत चुनाव के परिणामों से सत्तासीन कांग्रेस के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कांग्रेसियों को जीत की बधाई देते हुए सरकार के कामों का फल बताया पर दूसरी ओर सचिन पायलट और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की राजनैतिक रार में बटी कांग्रेस में पायलट समर्थकों का तंज फिर एक बार मुख्यमंत्री खेमे के माने जाने वाले विधायक निर्दलीय विधायकों पर कसा गया है जिसमें उन्होने कहा कि सत्ता और मुख्यमंत्री के जो लोग बेहद हमदर्द थे उनके ही समर्थको ने पंचायत चुनाव में कांग्रेस की खुशी में थोडे गम की आत दे दी।
टिकट वितरण के समय कांग्रेस पार्टी ने समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायकों के कहने पर उनके परिजनों व उनके समर्थको को टिकट दिए थे जिनमें से अधिकांश विधायकों के समर्थक और परिजनों को हार का सामना करना पडा। निर्दलीयों में अकेले बाबूलाल नागर ही नहीं सिरोही में संयम लोढ़ा, गंगापुर में रामकेश मीना आदि अधिकांश सुलट गए। यहां करारी हार का सामना करना पड़ा। पंचायतीराज चुनावों में इस बार सरकार ने समर्थक निर्दलीयों की सिफारिश पर टिकट दिए थे, लेकिन यह सियासी प्रयोग सफल नहीं हुआ। सचिन पायलट के मुखर विरोधी रहे गहलोत समर्थक निर्दलीय विधायक सिरोही विधायक संयम लोढ़ा, दूदू विधायक बाबूलाल नागर और गंगापुर विधायक रामकेश मीणा के इलाकों में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है। सरकार समर्थक महुवा से निर्दलीय विधायक ओमप्रकाश हुड़ला के क्षेत्र की पंचायत समिति में कांग्रेस को बहुमत नहीं मिला। शाहपुरा से निर्दलीय आलोक बेनीवाल के क्षेत्र में भी कांग्रेस बहुमत से दूर रह गई। बस्सी से निर्दलीय विधायक लक्ष्मण मीणा की दो में से एक पंचायत समिति बस्सी में कांग्रेस को बहुमत मिला है। 6 जिलों में 6 सरकार समर्थक निर्दलीय विधायकों की सिफारिश पर टिकट दिए थे जिनमें से बस्सी को छोड़ कहीं बहुमत नहीं आया। पंचायत समिति और जिला परिषद उम्मीदवारों के चयन में इस बार सरकार समर्थक निर्दलीय विधायकों की सिफारिश मानी गई। कांग्रेस की बैठकों में भी समर्थक निर्दलीय आए। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में टिकटों पर चर्चा के लिए जिलेवार बैठकों में निर्दलीय विधायकों की सिफारिश पर टिकट देने का कांग्रेस के हारे हुए उम्मीदवारों ने विरोध किया था। विरोध करने वालों में ज्यादतर सचिन पायलट समर्थक थे। कांग्रेस समर्थक निर्दलीय विधायकों के क्षेत्रों में भारी गुटबाजी है। इन क्षेत्रों में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लडऩे वाले उम्मीदवार और निर्दलीय विधायकों के समर्थक आमने सामने हैं। इन क्षेत्रों में सरकार और संगठन में निर्दलीय विधायकों को तवज्जो देने का कांग्रेस नेता विरोध कर रहे हैं। पंचायतीराज चुनावों में इसी खींचतान की वजह से कांग्रेस को निर्दलीय विधायकों के इलाकों में हार का सामना करना पड़ा। अब निर्दलीय विधायकों के इलाकों में पायलट समर्थकों को मुखर विरोध करने का मौका मिल गया है। निर्दलीय विधायकों की सलाह पर कांग्रेस के सिंबल बांटने का जब विरोध हुआ उस वक्त निर्दलीय बाबूलाल नागर ने पायलट समर्थकों पर तंज कसते हुए कहा था 27 साल कांग्रेस के लिए काम करने और कुछ महीने नारे लगाने में अंतर होता है। सिंबल की बात करने वाले पॉलिटिकली इनमैच्योर हैं। बाबूलाल नागर के इलाके में फागी, दूदू और मौजमाबाद में कांग्रेस की बुरी तरह हार हुई है। नागर के बेटे जिला परिषद का चुनाव हार गए हैं सिरोही से निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा ने पूरे जिले के कांग्रेस टिकट तय करने में दखल दिया था, लेकिन उनकी सिफारिश वाले ज्यादातर उम्मीदवार हार गए। लोढ़ा के निर्वाचन क्षेत्र की शिवगंज पंचायत समिति में पहली बार भाजपा का बहुमत आया, जबकि सिरोही पंचायत समिति में भी भाजपा को बहुमत मिला है।