नई दिल्ली : अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम कम होने के बाद भारत में भी पेट्रोल और डीजल के दामों में कमी आई है। रविवार आधी रात से पेट्रोल के दाम 91 पैसे प्रति लीटर और डीजल के दाम 84 पैसे प्रति लीटर कम हो गए हैं। जून से कच्चे तेल के मूल्य में भारी गिरावट आई है।

दरअसल ओपेक राष्ट्रों ने कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती करने से मना कर दिया था जिससे डीजल और पेट्रोल की कीमत कम होने का रास्ता साफ हो गया था। इसी हफ्ते ब्रेंट क्रुड (कच्चे तेल) की कीमत 4 साल में पहली बार सबसे तेज गिरावट के साथ हाल ही में 76.30 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी।

पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन (ओपेक) में गल्फ प्रडयूसरों, सऊदी अरब, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात की गुरुवार को ऑस्ट्रिया में संपन्न ऑफिशल मीटिंग के दौरान उत्पादन कटौती का प्रस्ताव पेश नहीं किया गया। इस तरह से उन लोगों ने पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स की कीमतों में उछाल की संभावना को कम कर दिया था।

ब्रेंट क्रुड के मूल्य में बीते गुरुवार को 1 डॉलर की कमी के साथ तेल का मूल्य सितंबर 2010 के बाद से सबसे निचले स्तर पर पहुंचकर 76.28 डॉलर प्रति बैरल हो गया था। अमेरिकी कच्चे तेल में भी 1 डॉलर की गिरावट आई थी जिसके बाद इसकी कीमतें 72.61 डॉलर प्रति बैरल हो गई थीं।

तेल की कीमत कम होने से भारत सरकार को मुद्रास्फीति पर काबू पाने में सहायता मिलेगी। इसके साथ ही देश की इकॉनमी भी स्थिर होगी। भारत दुनिया का चौथा सर्वाधिक ऑयल कंज्यूमर देश है। यहां हर साल 145 बिलियन डॉलर यानी करीब 9000 अरब रुपए का कीरब 190 मिलियन टन कच्चा तेल इंपोर्ट किया जाता है। तेल की कीमत में कमी होने से सरकार को 4,000 करोड़ रुपए की बचत होगी।