चंडीगढ़: मनोहर लाल खट्टर हरियाणा के शायद पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जो कि न सिर्फ समाजसेवक के नाते हरियाणा के हर जिले में कुछ वर्ष बिता चुके हैं, बल्कि उन्हें प्रदेश के किसान, व्यापारी, उद्यमी आदि को आती समस्याओं का प्रैक्टीकल तजुर्बा है।

एक राजनीतिक कार्यकत्र्ता के जीवन में ऐसा अनुभव नहीं आता, क्योंकि अब तक मुख्यमंत्री रहे सब नेता एक ही इलाके में पले बढ़े हैं व एक ही तरह का काम करते हैं, परन्तु मनोहर लाल की जीवन यात्रा कुछ अलग तरह की है, जिस कारण इन्हें यह सब अनुभव हो गए। बंटवारे के बाद इनका परिवार गांव बनियानी में आकर बस गया और यहां पर मनोहर लाल 10वीं कक्षा तक अपने पिता जी का खेतीबाड़ी में न सिर्फ सहयोग करते आए, बल्कि जमीन की जमीन की जुताई, बिजाई, सिंचाई आदि से लेकर मंडी में फसल सब्जी आदि बेचने का काम स्वयं किया।

10वीं उपरांत मैडीकल की पढ़ाई हेतु मनोहर लाल अपने रिश्तेदारों के पास दिल्ली चले गए और वहां तैयारी करते हुए अपने रिश्तेदारों के व्यापार में सहयोग देते हुए वह व्यापार की तरफ आकॢषत हो गए व पिताजी से 5 हजार रुपए लेकर स्वयं का कपड़े का व्यापार शुरू कर दिया। कुछ वर्षों तक व्यापार के बाद मैन्युफैक्चरिंग का काम सफलता से करते हुए वह समाजसेवा की तरफ आकॢषत हुए व संघ के प्रचारक निकल गए।

1994 से 2004 तक हरियाणा प्रांत में भाजपा के महामंत्री संगठन के नाते पूरे प्रदेश में प्रवास करते रहे और राजनीतिक नेता के नाते लोगों की समस्याओं से रूबरू होते रहे। 2004 में उन्हें क्षेत्र का संगठन मंत्री बनाकर जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल की जिम्मेदारी दे दी गई।

2014 के लोकसभा चुनाव में उनको हरियाणा लोकसभा चुनाव अभियान कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया गया। यह सभी जिम्मेदारियां उन्हें लोगों को आती कठिनाइयों की और वास्तविक जानकारी दे गया। यही कारण है कि हम मानते हैं कि मनोहर लाल को हरियाणा के किसान, छोटा व्यापारी, व्यापारी, मैन्युफैक्चरर व आम आदमी को पेश आती व्यवहारिक समस्याओं की जानकारी है।