मुंबई| वर्ष 2016 के चर्चित फिजियोथेरेपिस्ट बलात्कार और हत्या मामले में मुंबई की बॉम्बे हाईकोर्ट ने बड़ा निर्णय सुनाया है। उच्च न्यायालय ने आरोपी देबाशीष धारा को निचली अदालत द्वारा सुनाई गई मृत्युदंड की सजा को रद्द करते हुए उसे तत्काल बरी करने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति मंजूषा देशपांडे की खंडपीठ ने 4 अक्टूबर 2019 को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा दिए गए सजा के आदेश को निरस्त करते हुए यह फैसला सुनाया।
जानिए क्या था पूरा सनसनीखेज मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह दर्दनाक वारदात 5 और 6 दिसंबर 2016 की मध्यरात्रि मुंबई के एक उपनगरीय इलाके में घटी थी। 24 वर्षीया पीड़िता अपने घर के मचाननुमा कमरे में पढ़ाई और सोने के लिए गई थी। रात करीब 3 बजे कमरे से धुआं निकलता देख पड़ोसियों और परिजनों ने दरवाजा खोला, जहाँ आग लगी हुई थी। आग बुझाने पर पीड़िता फर्श पर अचेत अवस्था में मिली, जिसकी गर्दन पर जींस लिपटी हुई थी। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पीड़िता के साथ दरिंदगी और गला घोंटकर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई थी।
पश्चिम बंगाल से हुई थी आरोपी की गिरफ्तारी
वारदात के समय 29 वर्षीय आरोपी देबाशीष धारा पीड़िता के घर के समीप स्थित एक आभूषण की दुकान में कार्यरत था। घटना के लगभग दो महीने पश्चात उसे पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया गया था। निचली अदालत ने आरोपी को घर में अनधिकृत प्रवेश, बलात्कार, अप्राकृतिक कृत्य और हत्या का दोषी मानते हुए इसे 'रेअरेस्ट ऑफ द रेयर' (दुर्लभ से दुर्लभतम) मामला करार दिया था और फांसी की सजा सुनाई थी, जिसकी पुष्टि के लिए राज्य सरकार हाईकोर्ट पहुंची थी।
हाईकोर्ट का रुख और सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी
उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि पूरा मामला केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों (circumstantial evidence) पर आधारित था और आरोपी को महज संदेह के आधार पर आरोपित किया गया था। साक्ष्यों की कड़ी पूरी न होने के आधार पर अदालत ने आरोपी को राहत प्रदान की। वहीं दूसरी ओर, फैसले के बाद पीड़िता के परिजनों के विधिक प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि वे इस निर्णय के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।





