ब्रज क्षेत्र भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है. यहां भरतपुर से लेकर डीग, गोवर्धन और नाथद्वारा तक कई प्रसिद्ध कृष्ण मंदिर श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं. बांके बिहारी मंदिर में भगवान के बाल स्वरूप के दर्शन, मुकुट मुखारविंद मंदिर में गोवर्धन लीला से जुड़ी आस्था और श्रीनाथजी मंदिर की अनूठी पूजा-पद्धति भक्तों के लिए खास आकर्षण हैं. जन्माष्टमी, होली और अन्य धार्मिक पर्वों पर इन मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है. अगर आप कृष्ण भक्ति और ब्रज की धार्मिक परंपराओं को करीब से महसूस करना चाहते हैं तो इन मंदिरों की यात्रा खास अनुभव दे सकती है.
अगर आप भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और ब्रज की धार्मिक आस्था से जुड़े मंदिरों के दर्शन करना चाहते हैं तो ब्रज क्षेत्र में ऐसे कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, जहां सालभर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. मान्यता है कि इन मंदिरों में सच्चे मन से भगवान के दर्शन और पूजा-अर्चना करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती है. यही वजह है कि राजस्थान, उत्तर प्रदेश सहित देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं. आज हम आपको ब्रज के ऐसे ही पांच खास कृष्ण मंदिरों के बारे में बताएंगे.

पहला नाम है भरतपुर शहर में स्थित बांके बिहारी मंदिर का आता है जो भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को समर्पित है. यहां भगवान को बांके बिहारी के नाम से पूजा जाता है. मंदिर की सबसे खास बात यहां होने वाली दर्शन व्यवस्था है. जहां पर्दा कुछ-कुछ समय बाद खोला और बंद किया जाता है. मान्यता है कि बांके बिहारी की मोहिनी छवि को लगातार देखने से भक्त भाव-विभोर हो जाते हैं. जन्माष्टमी, होली और अन्य धार्मिक पर्वों पर यहां विशेष आयोजन होते हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

मुकुट मुखारविंद मंदिर डीग क्षेत्र में स्थित है. यह मंदिर ब्रज की धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है. यहां भगवान श्रीकृष्ण के गोवर्धन धारण करने की लीला से जुड़ी मान्यताएं श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती हैं. भक्त यहां भगवान के स्वरूप के दर्शन करने के साथ गोवर्धन परिक्रमा भी करते हैं. धार्मिक पर्वों और विशेष अवसरों पर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है.

ब्रज का श्रीनाथजी मंदिर भगवान श्रीकृष्ण के श्रीनाथ स्वरूप की भक्ति का प्रमुख केंद्र है. यहां भगवान को गोवर्धन पर्वत धारण किए हुए बाल स्वरूप में पूजा जाता है. मंदिर की पूजा-पद्धति और यहां होने वाले श्रृंगार भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं. देशभर से श्रद्धालु श्रीनाथजी के दर्शन करने नाथद्वारा पहुंचते हैं और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.