नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव मतगणना के दौरान 'टोटलाइज़र मशीन' के उपयोग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से उसका रुख स्पष्ट करने को कहा है। अदालत का मानना है कि इस विषय पर नियमों में बदलाव की आवश्यकता को देखते हुए सरकार का पक्ष जानना बेहद महत्वपूर्ण है। वर्ष 2014 में दायर इस याचिका में मांग की गई थी कि प्रत्येक मतदान केंद्र की ईवीएम से अलग-अलग वोटों की गिनती करने के बजाय पूरे संसदीय क्षेत्र की मतगणना टोटलाइजर के जरिए एक साथ कराई जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- केंद्र की क्या है राय, निष्पक्षता पर जताया सवाल

सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने टिप्पणी की कि चुनाव प्रक्रिया में टोटलाइजर को शामिल करने के लिए नियमों में संशोधन की जरूरत होगी, जिसके लिए केंद्र का दृष्टिकोण आवश्यक है। इसके साथ ही अदालत ने इसके पारदर्शी होने पर भी सवाल उठाया और कहा कि बूथ-वार गिनती में गड़बड़ी या छेड़छाड़ का आसानी से पता चल जाता है, जबकि टोटलाइज़र के इस्तेमाल से यह प्रक्रिया उतनी पारदर्शी नहीं रह जाएगी। अदालत ने सवाल किया कि इस व्यवस्था से लोकतंत्र को क्या बड़ा लाभ होगा?

चुनाव आयोग का जवाब: कानून में संशोधन की जरूरत

निर्वाचन आयोग ने अदालत को अवगत कराया कि टोटलाइज़र के उपयोग के लिए विधिक संशोधनों की आवश्यकता है, जो आयोग के क्षेत्राधिकार से बाहर है। आयोग ने पहले इसके लिए सरकार से संपर्क किया था, जिसके बाद गठित विशेषज्ञों की समिति और मंत्रियों के समूह (GoM) ने इस प्रस्ताव पर असहमति जताई थी। हालांकि, चुनाव आयोग ने वर्ष 2007 में शुरुआत में इसका समर्थन किया था।

याचिकाकर्ता का तर्क: गोपनीयता की रक्षा और हिंसा पर लगेगी रोक

याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि टोटलाइज़र मशीन मतदाताओं की गोपनीयता बनाए रखने और चुनाव के बाद होने वाली हिंसा को रोकने में अत्यंत सहायक होगी। उन्होंने तर्क दिया कि विश्व के कई देश केवल नागरिकों की निजता की सुरक्षा के लिए इस तकनीक का प्रयोग कर रहे हैं। इससे यह उजागर नहीं होगा कि किस विशिष्ट बूथ से किस प्रत्याशी को कितने मत मिले हैं।

क्या होती है टोटलाइज़र मशीन?

टोटलाइज़र एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक तंत्र है जो एक साथ कई ईवीएम (EVM) मशीनों को आपस में जोड़कर उनके वोटों का एकमुश्त मिलान कर देता है। वर्तमान व्यवस्था में प्रत्येक बूथ की मतगणना अलग-अलग होती है, जिससे राजनीतिक दलों को बूथ-वार वोटिंग पैटर्न का पता चल जाता है। टोटलाइज़र इस पैटर्न को गुप्त रख देता है, जिससे किसी भी दल को क्षेत्र विशेष के वोट आंकड़ों की जानकारी नहीं हो पाती।