सावन का महीना भगवान शिव की आराधना और प्रकृति की हरियाली के लिए विशेष माना जाता है. साल 2026 में सावन मास की शुरुआत 30 जुलाई दिन गुरुवार से हुई थी और इसका समापन 28 अगस्त दिन शुक्रवार को सावन पूर्णिमा एवं रक्षाबंधन के दिन होगा. सावन आते ही बाजारों में हरी चूड़ियों, हरी साड़ियों और मेहंदी की रौनक भी बढ़ जाती है. सुहागिन महिलाओं की भीड़ ऐसे स्टॉल पर सबसे ज्यादा दिखती है. दुकानदार भी खास सावन कलेक्शन सजाते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरा रंग प्रकृति, समृद्धि, सौभाग्य और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है. सावन में चारों ओर हरियाली दिखाई देती है, इसलिए हरे रंग को इस मौसम से विशेष रूप से जोड़ा जाता है. आइए जानते हैं सावन में हरी चूड़ियां ही क्यों मानी जाती हैं शुभ…
समृद्धि और खुशहाली का रंग हरा
सावन का महीना बारिश और हरियाली का प्रतीक माना जाता है. बरसात के साथ ही सूखी धरती हरी चादर ओढ़ लेती है और चारों तरफ नई ऊर्जा और जीवन का एहसास होता है. इसी वजह से हरा रंग समृद्धि, खुशहाली, उन्नति और नई शुरुआत का प्रतीक माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में हरे रंग का उपयोग करने से जीवन में सकारात्मकता आती है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है. धार्मिक दृष्टि से हरा रंग माता पार्वती से भी जुड़ा माना जाता है. सावन में माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है. इसलिए महिलाएं हरे वस्त्र, हरी चूड़ियां और मेहंदी धारण करके माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करती हैं.
अखंड सौभाग्य का मिलता है आशीर्वाद
धर्म शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव का प्रकृति से गहरा संबंध माना जाता है. उनकी पूजा में बेलपत्र, धतूरा, भांग और अन्य हरी वस्तुएं अर्पित की जाती हैं. वहीं माता पार्वती को सौभाग्य और सुहाग की देवी माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि जो महिलाएं सावन में हरी चूड़ियां पहनकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं, उन्हें अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार में खुशहाली का आशीर्वाद मिलता है.
हरियाली तीज पर हरे रंग का महत्व
सावन के दौरान हरियाली तीज जैसे प्रमुख त्योहार भी मनाए जाते हैं. इस दिन महिलाएं हरे रंग के वस्त्र पहनती हैं, हाथों में मेहंदी रचाती हैं और हरी चूड़ियों से श्रृंगार करती हैं. माना जाता है कि यह श्रृंगार माता पार्वती को प्रिय है और इससे वैवाहिक जीवन में प्रेम, विश्वास और मधुरता बनी रहती है.
हरी चूड़ियां पहनने की परंपरा
सावन के महीने में महिलाओं के बीच हरी चूड़ियां पहनने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. सिर्फ धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, हरी चूड़ियों का सांस्कृतिक महत्व भी बहुत खास है. भारतीय परंपरा में चूड़ियां सुहाग की निशानी मानी जाती हैं. उनकी खनक घर में शुभता और आनंद का संदेश देती है. इसलिए सावन में महिलाएं नई हरी चूड़ियां पहनकर अपने परिवार की सुख-शांति और पति की लंबी आयु की कामना करती हैं. हालांकि, हरी चूड़ियां पहनने का महत्व मुख्यतः लोकपरंपरा और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. यह सावन की सुंदरता, स्त्री-सौंदर्य, प्रकृति और सौभाग्य का प्रतीक बनकर भारतीय संस्कृति में विशेष स्थान रखता है.
सावन में हरी चूड़ियां पहनने का धार्मिक महत्व
सौभाग्य और सुहाग का प्रतीक: शास्त्रों में हरा रंग प्रकृति, समृद्धि और जीवन का प्रतीक माना गया है. सावन माह में हरी चूड़ियां पहनने से सुहाग की उम्र लंबी होती है और वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है.
भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा: हरा रंग भगवान शिव और माता पार्वती को अति प्रिय है. मान्यता है कि सावन में हरा रंग धारण करने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देते हैं.
प्रकृति और हरियाली से जुड़ाव: सावन का महीना चारों तरफ हरियाली लेकर आता है. इस महीने में हरा रंग धारण करना प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने और सकारात्मक ऊर्जा को अपनाने का जरिया माना जाता है.
बुध ग्रह की मजबूती: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हरे रंग का संबंध बुध ग्रह से है. सावन में हरी चूड़ियां पहनने से कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होता है, जिससे करियर, बुद्धि और व्यापार में तरक्की मिलती है.





