नई दिल्ली: NEET परीक्षा पर्चा लीक विवाद और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के त्यागपत्र की मांग को लेकर राजधानी के जंतर-मंतर से भड़की आंदोलन की चिंगारी अब पूरे भारत में फैल चुकी है। चौतरफा बढ़ते दबाव के बीच आखिरकार शिक्षा मंत्री को अपने पद से त्यागपत्र देना ही पड़ा। शनिवार को हुए इस बड़े सियासी घटनाक्रम के बाद भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता और मध्य प्रदेश शासन में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने दावा किया कि धर्मेंद्र प्रधान के इस कदम ने देश में अशांति और हिंसा फैलाने की मंशा रखने वाली तमाम विदेशी शक्तियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने मुख्य विपक्षी दल पर तीखा हमला बोलते हुए सवाल दागा कि क्या इस पूरे प्रदर्शन के दौरान किसी कांग्रेसी को एक भी लाठी पड़ी?
विपक्ष पर साधा निशाना, आंदोलन में भूमिका पर उठाए सवाल
कैलाश विजयवर्गीय ने कांग्रेस की मंशा और उनकी भूमिका पर तंज कसते हुए कहा कि अगर पड़ोसी के घर में चिराग रोशन हो और कांग्रेस उसका जश्न मनाने लगे, तो इसमें उनका क्या योगदान रह जाता है? इस पूरे घटनाक्रम में भी विरोध की कमान छात्रों के हाथ में थी, जबकि कांग्रेसी सिर्फ पीछे जाकर खड़े हो गए थे। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने खुद आगे आने के बजाय मासूम विद्यार्थियों को आगे कर दिया और खुद तमाशबीन बने रहे। छात्रों को लाठियां खाने के लिए उकसाया गया, लेकिन संकट के समय में एक भी कांग्रेसी नेता ने पुलिस का डंडा नहीं झेला।
संगठन के प्रति निष्ठा और त्याग का दिया उदाहरण
भाजपा के वरिष्ठ नेता ने पर्दे के पीछे के घटनाक्रम से पर्दा उठाते हुए एक बड़ा खुलासा भी किया। उन्होंने बताया कि विरोध प्रदर्शन के शुरुआती दिन ही धर्मेंद्र प्रधान ने पार्टी नेतृत्व के सामने इस्तीफा देने की पेशकश कर दी थी। हालांकि, उस समय शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया था। बाद में जब हालात को देखते हुए संगठन ने निर्णय लिया, तो उन्होंने बिना एक पल की देरी किए पद छोड़ दिया। विजयवर्गीय के अनुसार, किसी भी अनुशासित कार्यकर्ता के लिए पद से ऊपर संगठन और राष्ट्र का हित होता है, और प्रधान ने यही साबित किया है।
छात्र राजनीति के दिनों से निभाई जिम्मेदारी
धर्मेंद्र प्रधान के व्यक्तित्व और उनके काम करने के तरीके की सराहना करते हुए विजयवर्गीय ने याद दिलाया कि वे उन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के दौर से जानते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधान को जो भी दायित्व सौंपा गया, उसे उन्होंने पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाया। एक सच्चे, समर्पित और अनुशासित सिपाही की यही पहचान होती है कि वह व्यक्तिगत पदों से परे हटकर हमेशा संगठन की गरिमा और देश के सम्मान को सर्वोपरि रखता है।





