नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) को लागू करने के केंद्र सरकार के फैसले ने राजनीतिक गलियारों में नया विवाद खड़ा कर दिया है। गृह मंत्रालय द्वारा दिल्ली पुलिस आयुक्त को तीन महीने की अवधि के लिए एनएसए के तहत कार्रवाई करने का अधिकार देने के बाद AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने युवाओं के आंदोलन को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ने के इस कदम पर तीखे सवाल उठाए हैं।

युवाओं के प्रदर्शन पर कड़े कानूनों का विरोध

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि अपने अधिकारों और बेहतर भविष्य के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताना सरासर गलत है। उनका मानना है कि सरकार को युवाओं की मांगों और चिंताओं को संवेदनशीलता से सुनना चाहिए, न कि उन पर ऐसे कड़े और सख्त कानून लागू करने की तैयारी करनी चाहिए जो उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करते हों।

लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की आजादी पर सवाल

ओवैसी ने जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि देश का युवा वर्ग रोजगार और पारदर्शी व्यवस्था के लिए आवाज उठा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ प्रधानमंत्री न्याय और जन-सुनवाई की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ पुलिस को बिना तुरंत कारण बताए लंबे समय तक हिरासत में रखने वाले अधिकार दिए जा रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार हालात को संभालने में नाकाम रहने के बाद अब दमनकारी कानूनों का सहारा ले रही है, जो अभिव्यक्ति की आजादी पर बड़ा हमला है।

गृह मंत्रालय का आदेश और विपक्षी हमला

गौरतलब है कि गृह मंत्रालय ने 19 जुलाई से प्रभावी करते हुए अगले तीन महीनों के लिए दिल्ली पुलिस आयुक्त को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, 1980 के तहत निरोधात्मक कार्रवाई करने की शक्तियां सौंपी हैं। इस फैसले के सामने आने के बाद से ही विपक्षी दल केंद्र सरकार पर हमलावर हैं और इस कदम को लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का प्रयास करार दे रहे हैं।