भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र आज, 20 जुलाई सोमवार से आरंभ हो रहा है, जो 24 जुलाई तक चलेगा। इस सत्र के दौरान मोहन सरकार राज्य के विकास और प्रशासनिक सुधारों को गति देने के उद्देश्य से सदन में नौ महत्वपूर्ण विधेयक पेश करेगी, जिनमें बहुप्रतीक्षित समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक सबसे प्रमुख है। रविवार को भोपाल के ग्राम जगदीशपुर में आयोजित कैबिनेट बैठक में यूसीसी के मसौदे समेत अन्य सभी विधेयकों को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है।

महत्वपूर्ण विधेयक और अनुपूरक बजट

सरकार इस सत्र में वित्तीय वर्ष का पहला अनुपूरक बजट भी पेश करने की तैयारी में है, जिसका आकार लगभग सात हजार करोड़ रुपये का होगा। इस बजट में मुख्य रूप से पूंजीगत निवेश और बुनियादी ढांचा विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। सदन में प्रस्तुत होने वाले प्रमुख विधेयकों में मध्यप्रदेश राजमार्ग (संशोधन) विधेयक, मध्यप्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक, मध्यप्रदेश धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक, मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, मध्यप्रदेश श्रम शक्ति संहिता और मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस विधेयक शामिल हैं। इसके अलावा पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज संशोधन अध्यादेश भी सदन में रखा जाएगा। सत्र की कार्यवाही प्रतिदिन सुबह 11 बजे शुरू होगी, जिसकी शुरुआत दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ होगी।

विपक्ष की रणनीति और तीखे तेवर

इस मानसून सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कड़े मुकाबले के आसार हैं। कांग्रेस ने सरकार को घेरने के लिए व्यापक रणनीति तैयार की है, जिसके लिए रविवार को आयोजित विधायक दल की बैठक में मंथन किया गया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में विपक्ष कानून-व्यवस्था, बढ़ती बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, किसानों की समस्या, नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ी, ओबीसी आरक्षण और बिजली संकट जैसे जनहित के मुद्दों को जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है। विशेष रूप से केन-बेतवा परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण और प्रभावित ग्रामीणों से जुड़े मामलों पर विपक्ष सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश करेगा।

सत्ता पक्ष की तैयारियों का जोर

विपक्ष के आक्रामक तेवर को देखते हुए सत्ता पक्ष ने भी अपनी कमर कस ली है। सरकार ने अपने सभी सदस्यों को निर्देशित किया है कि वे विपक्ष द्वारा उठाए जाने वाले हर सवाल का जवाब ठोस आंकड़ों और तथ्यों के साथ सदन में दें। सत्र के दौरान सरकार का प्रयास रहेगा कि सभी नौ महत्वपूर्ण विधेयकों को निर्बाध रूप से पारित कराया जाए। वहीं, सदन में दो ध्यानाकर्षण प्रस्तावों और 25 याचिकाओं के जरिए आम जनता की समस्याओं को भी प्रमुखता से रखा जाएगा, जिससे उम्मीद है कि सत्र के दौरान कार्यवाही में तीखी नोकझोंक देखने को मिलेगी।