बिलासपुर| दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले कम टिकट बिक्री वाले पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) केंद्रों को लेकर रेलवे प्रशासन एक नया नियम लागू करने की तैयारी में है। ऐसे आरक्षण केंद्र जहां रोजाना बुक होने वाले टिकटों की संख्या बेहद कम है, उनके संचालन समय को घटाकर अब सुबह 8:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक ही सीमित किया जाएगा। रेलवे बोर्ड इस संबंध में एक विस्तृत आंतरिक सर्वे करवा रहा है, जिसकी अंतिम रिपोर्ट आते ही जल्द ही आधिकारिक आदेश जारी कर दिए जाएंगे।

संसाधनों और स्टाफ के सही इस्तेमाल के लिए बनाई योजना

रेलवे द्वारा उठाए जा रहे इस कदम का मुख्य उद्देश्य उन काउंटरों पर मैनपावर (कर्मचारियों) और अन्य तकनीकी संसाधनों का सही सदुपयोग करना है, जहां टिकट खिड़की पर यात्रियों का आना लगातार कम हो रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, कई छोटे केंद्रों पर दोपहर के बाद रिजर्वेशन कराने के लिए इक्का-दुक्का लोग ही पहुंचते हैं, जिससे वहां तैनात रेल कर्मियों के समय और संसाधनों का पूरा उपयोग नहीं हो पाता। इसी को देखते हुए कार्यप्रणाली को चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए समय में बदलाव किया जा रहा है।

क्या है रेल मंडल का अगला मास्टर प्लान?

समय कटौती के बाद खाली होने वाले रेल कर्मचारियों को मंडल के उन अन्य व्यस्त काउंटरों या विभागों में तैनात किया जा सकता है, जहां स्टाफ की भारी किल्लत है। चूंकि वर्तमान में कई अनुभवी कर्मचारी लगातार सेवानिवृत्त (रिटायर) हो रहे हैं और नई नियुक्तियां सीमित हैं, इसलिए इस आंतरिक फेरबदल से रेलवे का कामकाज प्रभावित नहीं होगा। जारी सर्वे में हर केंद्र की दैनिक टिकट बिक्री, वहां आने वाले यात्रियों की संख्या और स्थानीय जनता की जरूरत का पूरा डेटा जुटाया जा रहा है, जिसके बाद ही प्रभावित काउंटरों की अंतिम सूची जारी की जाएगी।

मंडल के इन बड़े स्टेशनों पर पुराना नियम ही रहेगा लागू

विंडो बुकिंग का समय घटाने का यह नया नियम रेल मंडल के प्रमुख और बड़े रेलवे स्टेशनों पर बिल्कुल भी प्रभावी नहीं होगा। बिलासपुर, उसलापुर, चांपा और रायगढ़ जैसे बड़े स्टेशनों पर आरक्षण केंद्र पहले की तरह ही अपने निर्धारित पूरे समय तक संचालित होते रहेंगे, क्योंकि इन स्टेशनों पर पैसेंजर्स का दबाव हमेशा बना रहता है और यहां प्रत्यक्ष टिकटों की बिक्री की स्थिति सामान्य और बेहतर है।

डिजिटल बुकिंग और मोबाइल ऐप्स का बढ़ता क्रेज

इस बदलाव के पीछे की एक बड़ी वजह यह भी है कि अब अधिकांश यात्री काउंटर की कतारों से बचते हुए मोबाइल एप्लीकेशन (जैसे IRCTC) और आधिकारिक वेबसाइटों के जरिए घर बैठे ही अपना रिजर्वेशन करा रहे हैं। ऑनलाइन टिकट बुकिंग के बढ़ते चलन के कारण ही जमीनी स्तर पर पीआरएस काउंटरों की उपयोगिता कम होती जा रही है, जिसे देखते हुए रेलवे का यह नया फैसला पूरी तरह व्यावहारिक नजर आता है।