इस्लामाबाद। पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के रावलकोट शहर में पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। इस इलाके में इस्लामाबाद के जबरन नियंत्रण और दमनकारी नीतियों के विरोध में हजारों की संख्या में स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए हैं। रावलकोट में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ यह व्यापक और उग्र विरोध प्रदर्शन पिछले 22 दिनों से लगातार जारी है, जिसने सरकार की नींद उड़ा दी है।

'अब पाकिस्तान का नियंत्रण मंजूर नहीं' – ईदगाह मैदान में गूंजी आवाज

शहर के मुख्य ईदगाह ग्राउंड में आयोजित एक विशाल जनसभा के दौरान प्रदर्शनकारियों और स्थानीय नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि इस क्षेत्र को अब पाकिस्तान के अधीन या उसके नियंत्रण में बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जाएगा। वक्ताओं ने पाकिस्तानी सेना और प्रशासन पर संसाधनों की लूट और मानवाधिकारों के हनन का आरोप लगाया। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी हुकूमत को सीधे तौर पर ललकारते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी स्वायत्तता और अधिकारों का सम्मान नहीं किया गया, तो वे पाकिस्तान से नाता तोड़कर भारत के साथ विलय (जुड़ने) के लिए कदम उठाएंगे।

बढ़ती महंगाई, आटे और बिजली के संकट ने सुलगcommitाई आग 

आंदोलन की मुख्य वजहें:स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस आंदोलन की शुरुआत केवल राजनैतिक अधिकारों के लिए नहीं, बल्कि बुनियादी जरूरतों के संकट के कारण हुई है। रावलकोट और आसपास के इलाकों में आटे की भारी किल्लत, आसमान छूती महंगाई और खुद के क्षेत्र में बिजली पैदा होने के बावजूद स्थानीय जनता पर लगाए गए भारी-भरकम टैक्स और लोडशेडिंग ने लोगों को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर किया है। 'अवामी एक्शन कमेटी' के बैनर तले लोग अब आर-पार की लड़ाई लड़ रहे हैं।

प्रशासन की सख्ती बेअसर, घाटी में तनाव बरकरार

पाकिस्तानी सरकार और स्थानीय पुलिस ने कई जगह बैरिकेड्स लगाकर और प्रदर्शनकारियों को डरा-धमकाकर इस आंदोलन को कुचलने की कोशिश की है, लेकिन जनता का आक्रोश थमता नजर नहीं आ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक इस पूरे क्षेत्र से टैक्स का बोझ कम नहीं किया जाता और उन्हें उनके हक नहीं मिलते, तब तक चक्काजाम और धरना प्रदर्शन अनिश्चितकाल के लिए जारी रहेगा। फिलहाल पूरे रावलकोट क्षेत्र में सुरक्षा बल तैनात हैं और माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है।