देचू। फलोदी जिला मुख्यालय से करीब 42 किलोमीटर दूर स्थित फतेहगढ़ गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक ही परिवार के चार लोगों की जिंदगी पल भर में खत्म हो गई। एक किसान ने कथित तौर पर अपनी पत्नी, बेटी और बेटे की गला दबाकर हत्या करने के बाद खुद भी मौत को गले लगा लिया। मंगलवार सुबह जब चारों के शव खेत में पड़े मिले, तो पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी और प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए साक्ष्य जुटाने के लिए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम को भी मौके पर बुलाया गया है, जो घटनास्थल से बारीक सुराग इकट्ठा कर रही है।

खेत में बिखरी मिलीं लाशें

यह पूरी दर्दनाक घटना देचू थाना इलाके की है, जहां मृतक गेनाराम (35 वर्ष) अपने परिवार के साथ खेत में रहकर मजदूरी का काम करता था और अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहा था। पुलिस अधिकारियों से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह करीब 8 बजे ग्रामीणों को खेत में शव पड़े होने की जानकारी मिली थी। मौके पर पहुंचे महानिरीक्षक (IG) सत्येंद्र सिंह ने बताया कि तफ्तीश के दौरान महिला और दोनों बच्चों के शव जमीन पर बेसुध हालत में पाए गए, जबकि किसान का शव फंदे से लटका हुआ मिला। मृतकों की शिनाख्त किसान गेनाराम, उसकी पत्नी पुष्पा (32 वर्ष), 13 वर्षीय बेटी खुशबू और 10 वर्षीय बेटे किशन के रूप में की गई है।

मानसिक तनाव और तंत्र-मंत्र का चक्रव्यूह

पुलिस की शुरुआती जांच और ग्रामीणों से पूछताछ में इस खौफनाक कदम के पीछे एक बेहद परेशान करने वाली वजह सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि बीते कुछ समय से गेनाराम की पत्नी पुष्पा की मानसिक स्थिति ठीक नहीं चल रही थी, जिसके कारण पूरा परिवार गहरे तनाव में था। सही डॉक्टरी इलाज कराने के बजाय, अंधविश्वास और सामाजिक आशंकाओं के चलते परिवार पुष्पा को किसी स्थानीय भोपे (तांत्रिक) के पास ले गया था। परिजनों को यह अंदेशा था कि पुष्पा पर किसी ऊपरी हवा या भूत-प्रेत का साया है। माना जा रहा है कि पत्नी की बिगड़ती हालत, झाड़-फूंक के चक्कर और लगातार बढ़ते मानसिक अवसाद के कारण किसान बुरी तरह टूट चुका था, जिसके चलते उसने इस आत्मघाती और खौफनाक रास्ते को चुनकर पूरे परिवार को खत्म कर दिया। फिलहाल पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखकर मामले की विस्तृत जांच कर रही है।