पुणे: महाराष्ट्र की सबसे चर्चित मर्डर मिस्ट्री—'केतन अग्रवाल हत्याकांड'—में हर बीतते दिन के साथ ऐसे खुलासे हो रहे हैं जो किसी बॉलीवुड सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म को भी पीछे छोड़ दें। रियल एस्टेट कारोबारी केतन की हत्या के आरोप में उनकी मंगेतर सिया गोयल और उसका प्रेमी चेतन चौधरी इस वक्त पुलिस की गिरफ्त में हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने अब उस 'क्रिकेट कनेक्शन' और उन डिजिटल सबूतों की कड़ियों को जोड़ लिया है, जिन्होंने इस रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात की पटकथा लिखी थी। आइए परत-दर-परत समझते हैं कि कैसे एक क्रिकेट मैच से शुरू हुआ यह सिलसिला लोहगढ़ किले में खूनी अंजाम तक जा पहुंचा।
क्रिकेट ग्राउंड से हुई थी 'कातिल इश्क' की शुरुआत
पुलिस तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि 19 साल की सिया गोयल और मुख्य आरोपी चेतन चौधरी पहली बार कहां और कैसे मिले थे। जांच के मुताबिक, सिया की मुलाकात चेतन से उसके सगे भाई साहिल गोयल के जरिए हुई थी। साहिल और चेतन अक्सर एक साथ क्रिकेट खेला करते थे।
सिया कई बार अपने भाई का मैच देखने ग्राउंड पर जाया करती थी, जहां उसकी नजरें पहली बार चेतन से मिलीं। इसके बाद साल 2025 में एक दोस्त की दिवाली पार्टी के दौरान दोनों की दोबारा मुलाकात हुई, जिसके बाद दोस्ती धीरे-धीरे प्यार और फिर एक खतरनाक सनक में बदल गई।
6 महीने, 2004 कॉल्स और 238 घंटे की बातचीत!
जब पुलिस की साइबर सेल ने दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन का कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) निकाला, तो अधिकारी भी सन्न रह गए।
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कॉल काउंट: इस साल जनवरी से लेकर अब तक दोनों के बीच 2,004 बार फोन पर बात हुई।
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समय: दोनों ने कुल मिलाकर 238 घंटे फोन पर गुजारे।
इस बेतहाशा बातचीत से साफ है कि दोनों किस कदर एक-दूसरे के संपर्क में थे। इसी सिलसिले में पुणे पुलिस ने सिया के भाई साहिल गोयल को थाने बुलाकर शुक्रवार को करीब 10 घंटे तक मैराथन पूछताछ की। पुलिस यह पता लगा रही है कि क्या साहिल को अपनी बहन और दोस्त के इस अफेयर की भनक पहले से थी या नहीं।
मर्डर से 24 घंटे पहले कैफे में बना 'डेथ प्लान'
केतन अग्रवाल की हत्या 18 जून को लोहगढ़ किले की पहाड़ियों में की गई थी। लेकिन इस खौफनाक वारदात से ठीक एक दिन पहले यानी 17 जून को पुणे के लुल्लानगर इलाके के एक नामचीन कैफे में एक 'सीक्रेट मीटिंग' हुई थी।
सिया और चेतन दोपहर 4:30 से 5:30 बजे तक, करीब एक घंटे तक उस कैफे में आमने-सामने बैठे थे। पुलिस को पुख्ता अंदेशा है कि इसी 60 मिनट की मुलाकात के दौरान केतन को रास्ते से हटाने का फाइनल ब्लूप्रिंट तैयार किया गया था। पुलिस अब उस कैफे के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को अपने कब्जे में लेकर सबूत खंगाल रही है।
सबूत मिटाने की शातिर चाल: रिसाइकल बिन तक किया साफ
केतन को मौत के घाट उतारने के बाद दोनों ने कानून की आंखों में धूल झोंकने की पूरी कोशिश की। वारदात को अंजाम देने के तुरंत बाद सिया और चेतन ने अपने मोबाइल से सारे व्हाट्सएप चैट्स, इंस्टाग्राम मैसेजेस और कॉल लॉग्स डिलीट कर दिए।
शातिरपंती की हद तो तब हो गई जब उन्होंने पकड़े जाने के डर से फोन के 'रिसाइकल बिन' और 'ट्रैश फोल्डर' को भी पूरी तरह क्लियर कर दिया ताकि पुलिस डेटा रिकवर न कर सके। हालांकि, कातिल चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून से नहीं बच सकता। फिलहाल फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की एक स्पेशल टीम इन डिलीटेड चैट्स को रिकवर करने में जुट गई है, जिसके आते ही इस हत्याकांड का हर एक राज पूरी तरह बेनकाब हो जाएगा।





