जनता द्वारा जनता के नेता बने श्री शिवराज सिंह चौहान

भोपाल : बुधवार, मार्च 4, 2015, 14:23 IST

 

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की राजनैतिक यात्रा को जनता के लिये जनता के नेता बने कहना सर्वथा समीचीन होगा। वे राजनीति के ऐसे दैदीप्यमान नक्षत्र है जिसने भारतीय राजनीति और राज व्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन के कारनामे किये हैं। उनका व्यक्तित्व भारतीय संस्कृति का दर्पण है। सादा जीवन उच्च-विचार का प्रतिदर्श है। आचार-व्यवहार में विनयशील, मृदुभाषी इस आम आदमी का कृतित्व असाधारण रूप से विशाल और व्यापक है। जहाँ एक ओर उनका दिल सवा सात करोड़ जनता के लोक-कल्याण के लिये धड़कता है वहीं सवा सात करोड़ दिलों की धड़कन में भी उनका नाम रचा-बसा है। वे ऐसे जननेता हैं जिसने आम को खास आदमी बना दिया है। वे स्पष्ट तौर पर इसकी न केवल उद्घोषणा करते हैं बल्कि कार्य-व्यवहार में स्पष्ट रूप से दर्शित भी करवाते हैं। उनकी सरकार गरीबों की सरकार है। धन बल, शक्ति बल, प्रभुत्व संपन्नों को खुली चुनौती देने वाले इस जननेता ने आम आदमी को इतना खास बना दिया है कि गरीब बीमार आदमी अपनी कोई भी परेशानी सहजता से मुख्यमंत्री को बतला सकता है। उनका सृजनात्मक मस्तिष्क जन-कल्याण के लिये है, तो दिल पीड़ित मानवता की सेवा के लिये धड़कता है।

जनता द्वारा बना - जननेता

श्री चौहान जनता के द्वारा बनाये गये जननेता हैं। बुदनी के ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े शिवराज की नेतृत्व क्षमता को पहचानने का श्रेय भी यहाँ की जनता को जाता है। जिसने शोषित के दर्द को समझने वाले उनके दिल और अन्याय के खिलाफ खड़े होने वाले मस्तिष्क की शक्ति और क्षमता को बखूबी पहचाना, मात्र दस-बारह वर्ष की उम्र के छोटे से बालक के नेतृत्व में उनसे बड़ी उम्र के मजदूरों का एकजुट होना उनकी नेतृत्व क्षमता को जनता का पहला समर्थन था। यह नि:स्वार्थ जनसेवा का गुण और नेतृत्व की उनकी क्षमता ही थी जिसे बिना किसी वंशानुगत राजनैतिक आधार और आर्थिक शक्ति वाले युवा को जनता ने निरंतर प्रोत्साहित और प्रेरित किया। उनके जनसेवी व्यक्तित्व की महक कस्तूरी के समान तेजी से फैली। उनके नेतृत्व का दायरा निरंतर बढ़ता गया। वर्ष 1990 में वे बुदनी विधानसभा क्षेत्र के विधायक और 1991 में विदिशा संसदीय क्षेत्र से सांसद भी बन गये। जननेता की नेतृत्व क्षमता को भारतीय जनता पार्टी ने भी निखारने के भरपूर अवसर दिये। वर्ष 1988 से 1991 तक वे युवा मोर्चे के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में वर्ष 2002 से 2003 तक भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में और वर्ष 2005 में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के मिले संगठनात्मक दायित्वों ने जननेता के रूप में उनको ढालने का कार्य किया।

उनके व्यक्तिव का सबसे मजबूत पहलू जन-भावनाओं को समझने की अपार क्षमता में है। सार्वजनिक जीवन के विभिन्न अवसरों और उपक्रमों के विभिन्न चरणों में चाहे वह कार्यकर्ता के रूप में हो, पार्टी के संगठक की भूमिका हो अथवा राज्य के मुखिया की जिम्मेदारी, श्री चौहान हर जगह जनता की आवाज ही बने। नौ वर्ष से अधिक के मुख्यमंत्रित्व कार्यकाल में वे जन-आकांक्षाओं को नई बुलंदियों पर पहुँचाने का कार्य समर्पित भाव से निरंतर कर रहे हैं। वर्ष 2005 के अंत में मिली मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी जन-आकांक्षाओं को पूरा करने और अंत्योदय की संकल्पना को साकार करने का ही उपक्रम है। आमजन के हाव-भाव को पढ़ने और उनकी आँखों में झाँकने की अद्भुत क्षमता उनमें है। श्रोताओं के दिल में सीधे उतर कर दिल से बात करने की उनकी अनूठी शैली श्रोताओं के दिलों-दिमाग पर छा जाती है। फिर चाहे श्रोता ठेठ ग्रामीण अंचल के हों, न्यूयार्क सिटी के अप्रवासी भारतीय हो, अमेरिकी राजनयिक अथवा संयुक्त राष्ट्र संघ के अंतर्राष्ट्रीय नीति निर्माता, सभी के समक्ष वे प्रभावी तरीके से भारतीय जन-भावनाओं को अभिव्यक्त करते हैं। वे जनवाणी के मुखर वक्ता है।

जनता के लिये बना - जननेता

श्री चौहान जनता के लिये बने जननेता हैं। उनकी समस्याओं के समाधान के लिये निरंतर चिंतन और मनन करते हैं। वे बच्चे, बूढ़े, जवान, अमीर, गरीब, किसान, मजदूर, स्त्री-पुरूष सभी के दिलों में बसे हैं। सब उनके दिलों में बसे हैं। यह उनकी सर्वमान्यता ही है कि वे फाइव स्टार अभिजात्य संस्कृति को भी अपनी बात समझा लेते हैं वहीं गरीब झुग्गीवासी सर्वहारा वर्ग को भी आश्वस्त कर लेते हैं। मंच चाहे धनिकों का हो अथवा गरीबों का हो श्री चौहान बेबाकी से अपनी बात कहते हैं। वे साफ तौर से कहते हैं कि अमीर तो सरकार के साथ एडजस्ट हो जाते हैं या कर लेते हैं यह गरीब ही है जिसको सरकार की जरूरत है। वह आगे कहते हैं कि प्राकृतिक संसाधन सबके लिये हैं कुछ इसका उपयोग कर पाते हैं, कुछ नहीं करते हैं। इसलिये यह सरकार का दायित्व है कि वह उपयोग करने वाले से कराधान के माध्यम से राजस्व अर्जित करे। अर्जित राजस्व का उपयोग गरीब जरूरतमंद की सहायता के कार्यों में करें।

श्री चौहान समन्वयकारी जननेता है। उनकी वाणी, व्यवहार में समाज का हर वर्ग और समुदाय अपनी प्रतिछाया देखता है। वे बच्चों के बीच उत्साही स्वप्नदृष्टा, प्रेरक और स्नेहिल पालक हैं। प्रचार-प्रसार में संकोची श्री चौहान बच्चों के बीच जाने और उनके साथ जमीन पर भी बैठकर बतियाने और फोटो खिंचाने के लिये सदैव तैयार रहते हैं। छोटे से छोटा प्रसंग हो अथवा बड़े से बड़ा अंतर्राष्ट्रीय मंच श्री चौहान बच्चों के साथ उनके जुड़ाव को उल्लेखित करते हैं। माँ से दोगुना प्यार करने वाले 'मामा' इस जननायक की पहचान बन गई है। बच्चों, युवाओं की आशाओं, आकांक्षाओं को समझने वाला तथा बुर्जुगों के लिये आध्यात्मिक सुख और सेवा में ही सर्वस्व देखने वाले श्रवण कुमार का व्यक्तिव उनमें समाहित है। महिलाओं के लिये उनका व्यक्तित्व ऐसे भाई और बेटे का है जो उनकी आँख में आँसू नहीं आने पाये इसके लिये अपनी पूरी शक्ति और संकल्प के साथ सब कुछ न्यौछावर करने को तैयार है। युवाओं के मध्य जिद, जुनून और जज्बे से भरा उनका व्यक्तित्व ऐसे व्यक्ति का है जिसकी डिक्शनरी में असंभव का शब्द है ही नहीं। वह बड़ी से बड़ी चुनौती को आगे बढ़कर लेने को तैयार रहता है। ‍फिर वह राजनीति का मोर्चा हो अथवा विकास का मंच। प्रदेश के युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं रोजगार देने वाला बनाने का संकल्प युवाओं की आकांक्षाओं की प्रतिध्वनि ही है।

जननायक चौहान खिलाड़ियों के बीच छूना है आकाश की जिद् के लिये ऐड़ी-चोटी का दम लगाने वाले व्यक्ति हैं। खिलाड़ियों को खेल के अलावा सारी चिंताएँ छोड़ने की सलाह, उनकी जिम्मेदारियों को अपने ऊपर लेने का आश्वासन खिलाड़ियों में नई ऊर्जा भर देता है। वे समाज के हर वर्ग, हर समुदाय की आवाज हैं। किसानों के बीच वह किसान की आवाज है। वे साफ तौर पर कहते हैं कि किसानों के खेत तक पानी पहुँचा दो बाकी काम वह स्वयं कर लेगा। मजदूर की मजदूरी की माँग और सामाजिक सुरक्षा की जरूरत का अहसास उन्हें है। उसके हर दु:ख-सुख में सहायता और सहयोग के लिये वे प्रयत्नशील हैं। फेरी और फुटपाथ पर व्यवसाय करने वालों की सम्मानजनक तरीके से व्यवसाय की माँग जब श्री चौहान उठाते हैं तो वह उनके व्यक्तित्व से अभिभूत हो जाता है। उनका यह कहना है कि ग्रीन, स्मार्ट और ग्लोबल सिटी बनाने के लक्ष्य के साथ ही झुग्गियों में रहने वाले परिवारों की चिंता उनके भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य, और आवास की जरूरतों को पूरा करने का कार्य भी उनकी जिम्मेदारी है। वे इस जिम्मेदारी का निर्वहन पूरी शिद्दत के साथ कर रहे हैं। उनका यह कथन जननेता के रूप में उनकी सोच की स्वीकार्यता का सबसे प्रभावी प्रमाण है।

श्री शिवराज सिंह चौहान ऐसे जननेता है जिसका शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा भारतीय है। एकात्म मानववाद जिसका दर्शन और दृष्टि है। व्यक्तिगत रूप से वह भावुक, सहृदय दिल की सुनने वाले हैं। विचारशील भारतीय दर्शन के चिंतक है। खेलों में उनकी रूचि है। व्यस्ततम दिनचर्या में भी उनका पठन-पाठन का स्थान सुरक्षित है। जन-आकांक्षाओं को पूरा करने के लिये निरंतर कार्य करने को प्रतिबद्ध जननेता जनता की माँग पर सार्वजनिक मंच से गुनगुनाने में भी देर नहीं करता है। मित्र-मंडली, कार्यकर्ताओं, सहयोगियों के साथ गप-शप के जो भी मौके मिलते है उनमें वह गर्मजोशी के साथ शामिल होते हैं। विभिन्न धर्मों के त्यौहारों की उमंग के आयोजन हों अथवा विकास के विचार-विमर्श में आम आदमी की भागीदारी की पंचायत का कार्यक्रम हो, सभी में आम आदमी की भागीदारी के लिये मुख्यमंत्री निवास के द्वार सदैव खुले रहते हैं। संक्षेप में श्री शिवराज सिंह चौहान ऐसे जननेता है जिसे जनता ने ही जनता की सेवा के लिये बनाया है। वह इस जनता रूपी भगवान की आराधना में सर्वस्व समर्पित करने वाले संकल्पित उपासक हैं।