मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में स्थित करीब साढ़े चार सौ साल पुराना इच्छादेवी माता मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र है. ऐतिहासिक महत्व और धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध इस मंदिर में सालभर भक्तों का आना-जाना लगा रहता है. खासकर शारदीय नवरात्र के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. मंदिर में माता के दर्शन-पूजन के लिए मध्य प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, गुजरात सहित अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं.

संतान सुख की प्राप्ति से जुड़ी है मान्यता
इच्छादेवी माता मंदिर को लेकर क्षेत्र में कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं. मान्यता के अनुसार, भोसकुटे सरकार ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था. कहा जाता है कि उन्हें माता की कृपा से संतान सुख की प्राप्ति हुई थी. इसके बाद से ही मंदिर में संतान प्राप्ति की कामना लेकर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई। आज भी कई दंपती संतान सुख की मन्नत लेकर माता के दरबार में पहुंचते हैं और पूरे श्रद्धाभाव से पूजा-अर्चना करते हैं.
मन्नत पूरी होने पर चढ़ाते हैं चुनरी
मंदिर में आने वाले श्रद्धालु माता से अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं. भक्तों की मान्यता है कि सच्चे मन से माता की आराधना करने पर उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. मन्नत पूरी होने के बाद श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर माता को चुनरी चढ़ाते हैं और आभार व्यक्त करते हैं. इसी आस्था के चलते मंदिर की ख्याति आसपास के क्षेत्रों के साथ दूसरे राज्यों तक फैली हुई है.

नवरात्र में लगता है भव्य मेला
शारदीय नवरात्र के दौरान इच्छादेवी माता मंदिर परिसर में भव्य मेले का आयोजन होता है. इन दिनों मंदिर में सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है. भक्त माता के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं. मेले में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का माहौल रहता है.करीब साढ़े चार सौ साल पुराना यह मंदिर आज भी लोगों की आस्था, विश्वास और धार्मिक परंपराओं का प्रतीक बना हुआ है. माता के दर्शन करने और मन्नत मांगने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालुओं का पहुंचना इस मंदिर की विशेष पहचान है.