सैन फ्रांसिस्को। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की दुनिया में सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ओपनएआई के कॉन्फ्रेंस रूम में जासूसी की आशंका पैदा करने वाली एक छोटी डिवाइस मिलने से हड़कंप मच गया है। मात्र 13 डॉलर यानी लगभग 1200 रुपये कीमत वाली इस छोटी सी डिवाइस ने चुपचाप जासूसी को अंजाम देने की कोशिश की, जिससे टेक जगत में सनसनी फैल गई है।
टीवी के यूएसबी पोर्ट में छिपाया गया था माइक्रो-कैमरा
सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, यह संदिग्ध डिवाइस आकार में एक छोटे माइक्रो-कैमरे जैसी दिखाई देती है। इसे कॉन्फ्रेंस रूम में लगे एक टेलीविजन के यूएसबी पोर्ट में बेहद शातिर तरीके से लगाया गया था। इस खुलासे के बाद यह आशंका जताई जाने लगी है कि बैठकों के दौरान होने वाली अति-गोपनीय वार्ताओं और रणनीतिक जानकारियों पर अवैध तरीके से नजर रखी जा रही थी। हालांकि, इस डिवाइस की वास्तविक तकनीकी क्षमता क्या थी और इससे किसी तरह की गोपनीय रिकॉर्डिंग या डेटा चोरी होने की आधिकारिक पुष्टि अभी तक सामने नहीं आई है।
एआई कंपनियों की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस सनसनीखेज घटना ने दुनिया भर की शीर्ष एआई कंपनियों की आंतरिक सुरक्षा प्रणालियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इन तकनीकी दिग्गजों के पास अत्याधुनिक तकनीक, भविष्य के नए एआई मॉडल और दुनिया भर की संवेदनशील डिजिटल जानकारियां सुरक्षित होती हैं। ऐसे में मात्र कुछ सौ रुपये कीमत वाला एक मामूली सा उपकरण भी कंपनियों के लिए बहुत बड़ा सुरक्षा जोखिम साबित हो सकता है।
कर्मचारियों को दी गई विशेष सतर्कता बरतने की सलाह
इस सुरक्षा चूक के सामने आने के बाद रिपोर्ट में कर्मचारियों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत सभी कर्मियों को अनजान और अजनबी उपकरणों को लेकर पूरी तरह सतर्क रहने, किसी भी संदिग्ध डिवाइस की तुरंत सूचना देने तथा कार्यस्थलों पर कड़े डिजिटल व भौतिक सुरक्षा संबंधी प्रोटोकॉल का पालन करने की सख्त सलाह दी गई है।
तकनीक का विकास और बढ़ता दुरुपयोग
यह पूरी घटना यह स्पष्ट संदेश देती है कि केवल डिजिटल और साइबर सुरक्षा ही नहीं, बल्कि भौतिक निगरानी और कॉन्फ्रेंस रूम की नियमित जांच-पड़ताल भी उतनी ही आवश्यक है, अन्यथा किसी भी वक्त बड़ा धोखा हो सकता है। दूसरी ओर, तकनीक के सकारात्मक विकास के साथ-साथ इसके दुरुपयोग के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। इसका एक उदाहरण भारत में भी देखने को मिला है, जहां तकनीकी सहायता का उपयोग करते हुए राजस्थान की एसओजी (SOG) ने फर्जी दस्तावेजों और प्रमाण पत्रों के आधार पर मेडिकल काउंसिल में अवैध पंजीकरण कराने के गंभीर आरोप में चार फर्जी डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है। यह इस बात का प्रमाण है कि जैसे-जैसे तकनीक उन्नत हो रही है, वैसे-वैसे इसका आपराधिक और गलत इस्तेमाल भी बड़े पैमाने पर शुरू हो गया है।





