नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक पारा अचानक काफी चढ़ गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार की नीतियों और दिल्ली में की गई सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर कई गंभीर और तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कड़ा आरोप लगाया है कि जनता के शांतिपूर्ण प्रदर्शन को दबाने और रोकने के लिए सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर अघोषित पाबंदियां लगाई गईं, इंटरनेट सेवाएं बंद की गईं और भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई। दीपके ने इसे आम नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधा हनन बताते हुए साफ शब्दों में कहा कि किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई या गिरफ्तारी की आशंका उनके इरादों को कमजोर नहीं कर सकती।

विरोध प्रदर्शन रोकने की कोशिश का आरोप, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से पूछे सवाल

दिल्ली में होने वाले इस बड़े विरोध प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी बेहद तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार की सुरक्षा तैयारियों पर सीधे हमला बोला है। उनका कहना है कि सरकार इस आंदोलन को विफल करने के लिए बसें और मेट्रो सेवाएं बंद करवा रही है, इंटरनेट कनेक्शन काटे जा रहे हैं और सड़कों पर पुलिस की भारी तैनाती कर भय का माहौल बनाया जा रहा है। दीपके ने दो टूक कहा कि गिरफ्तारी का कोई भी डर उन्हें पीछे नहीं हटा सकता, क्योंकि ये सभी कदम लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधी चोट हैं।

  • जनता की आवाज दबाने का आरोप: दीपके ने खुलकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आम जनता की आवाज को बलपूर्वक दबाने का प्रयास किया जा रहा है। रेलवे, मेट्रो और प्रमुख सड़कों को बंद करने तथा इंटरनेट बाधित करने से सीधे-सीधे आम नागरिकों का जनजीवन और उनकी सहभागिता बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

  • सुरक्षा बलों की तैनाती पर सवाल: उन्होंने यह बड़ा दावा भी किया कि जम्मू-कश्मीर से सेना और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों को विशेष रूप से दिल्ली बुलाया गया है। दीपके ने सीधे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से सवाल किया कि क्या अपने ही देश के नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध को कुचलने के लिए इतने बड़े पैमाने पर बल प्रयोग और बंदोबस्त वाकई जरूरी है?

  • मुख्य चुनाव आयुक्त का उल्लेख: उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका का भी जिक्र करते हुए पूछा कि क्या उनके पद या फैसलों से जुड़ा कोई ऐसा विषय है, जिसके कारण निर्दोष नागरिकों के खिलाफ प्रशासन द्वारा इतनी भारी सख्ती बरती जा रही है।

घरों तक पुलिस पहुंचने का दावा, संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उठाया मुद्दा

अभिजीत दीपके ने एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि लोगों को इस प्रदर्शन में हिस्सा लेने से रोकने के लिए आवासीय सोसायटियों में बाकायदा लाउडस्पीकर से घोषणाएं की जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी लोगों के घरों तक पहुंचकर उन्हें विरोध प्रदर्शन से दूर रहने की हिदायत दे रहे हैं। इन कथित कदमों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए उन्होंने कहा कि अपनी बात को शांतिपूर्ण ढंग से रखना हर भारतीय नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करता है और अनुच्छेद 19(1)(b) शांतिपूर्वक तथा बिना हथियारों के एकत्र होने का मौलिक अधिकार देता है। हालांकि, लोक व्यवस्था और सुरक्षा के दृष्टिकोण से इन अधिकारों पर कानून के तहत उचित प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं। यही वजह है कि किसी भी प्रदर्शन या पाबंदी की वैधानिकता संबंधित प्रशासनिक आदेशों, परिस्थितियों और लागू कानूनों पर ही निर्भर करती है।

'यदि यूएपीए (UAPA) और एनएसए (NSA) के तहत भी हुई गिरफ्तारी, तब भी नहीं हटेंगे पीछे'

दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुँचने के बाद अपनी संभावित गिरफ्तारी के सवाल पर दीपके ने निडर होकर कहा कि यदि प्रशासनिक अधिकारी उन्हें हिरासत में लेना चाहते हैं या गिरफ्तार करना चाहते हैं, तो वे इसके लिए पूरी तरह से तैयार हैं। उन्होंने गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) जैसी कठोर धाराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की सख्त कानूनी कार्रवाई की आशंका के बावजूद उनका यह वैचारिक संघर्ष लगातार जारी रहेगा। दीपके ने अपने इस सख्त रुख को देश में स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव प्रणाली की बहाली और लोकतंत्र की रक्षा से जोड़ते हुए कहा कि वह अपने तय उद्देश्य से एक कदम भी पीछे नहीं हटेंगे।

अब पूरे मामले में प्रशासन के अगले कदम और आधिकारिक बयान पर टिकीं निगाहें

इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर लगाई गई कथित पाबंदियों, सुरक्षा बलों की अभूतपूर्व तैनाती और प्रदर्शनकारियों को दी गई चेतावनियों से जुड़े दावों की आधिकारिक व स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। शासन-प्रशासन का पक्ष और संबंधित विभागीय आदेश सामने आने के बाद ही स्थिति का वास्तविक आंकलन हो सकेगा। बहरहाल, दीपके के इस तीखे बयान ने शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रदर्शन, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और नागरिक स्वतंत्रताओं के संतुलन को लेकर एक नई राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है।