नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अयोध्या दौरे के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को सीधे तौर पर अयोध्या से चुनाव लड़ने की खुली चुनौती दी है। अखिलेश यादव यहाँ सपा नेता तेज नारायण उर्फ पवन पांडे द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के समापन समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने सरकार, प्रशासनिक एजेंसियों और चुनाव आयोग पर भी तीखे प्रहार किए।

सीएम को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती

अखिलेश यादव ने कहा कि यदि बड़े-बड़े दावे करने वाले मुख्यमंत्री इतने ही आश्वस्त हैं, तो वे खुद अयोध्या सीट से चुनाव लड़कर दिखाएं। इस दौरान उन्होंने यह भी ऐलान किया कि राज्य में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर अयोध्या के स्थानीय लोगों को रोजगार व प्राथमिकता दी जाएगी और प्रदेश की महिलाओं को हर साल 40 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।

भागवत कथा और सामाजिक न्याय का संदेश

सपा प्रमुख ने श्रीमद्भागवत कथा के प्रसंगों का जिक्र करते हुए कहा कि भगवान कृष्ण ने हमेशा शोषितों, पीड़ितों और वंचितों के उद्धार का मार्ग दिखाया है। उन्होंने भगवान श्री कृष्ण द्वारा द्वारका में महिलाओं को सम्मान और सुरक्षा देने का उदाहरण देते हुए कहा कि जब हम सबकी गरिमा का सम्मान करते हैं, तभी वास्तविक सामाजिक न्याय सुनिश्चित होता है।

सत्ता की एजेंसियों और सुदर्शन चक्र का जिक्र

अधिकारियों और सरकारी संस्थाओं को सीख देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र हमेशा सज्जनों की रक्षा के लिए होता है, न कि उन्हें डराने या आतंकित करने के लिए। शक्ति का उपयोग हमेशा सदुपयोग के लिए होना चाहिए, दुरुपयोग के लिए नहीं। आज के सत्ताधीशों और चुनाव आयोग को भी भगवान कृष्ण से यह प्रेरणा लेनी चाहिए।

'राज छल से नहीं, जनमत से मिलता है'

अखिलेश यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सत्ता या राज कभी छल-कपट से प्राप्त नहीं होता, बल्कि यह प्रेम, सद्भाव और जनमत से मिलता है। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण ने कभी हस्तिनापुर की गद्दी हथियाने के लिए छल का सहारा नहीं लिया, बल्कि हमेशा धर्म और न्याय के पक्ष में खड़े होकर पांडवों को उनका हक दिलाया था।