नई दिल्ली। दुनिया भर के महासागरों में रिकॉर्ड गर्मी और तेजी से बढ़ते तापमान का गंभीर खतरा मंडराने लगा है। इसके कारण महासागरों का जलस्तर, अम्लता और समुद्री लू (मरीन हीटवेव) का संकट लगातार गहराता जा रहा है, जो आने वाले समय में पूरी मानवता के लिए बड़ी आपदा साबित हो सकता है।
महासागरों में समाई रिकॉर्ड 23 जेटाजूल गर्मी
हाल ही में जारी 'कोपरनिकस ओशन स्टेट रिपोर्ट' के 10वें संस्करण में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पिछले साल दुनिया के महासागरों में रिकॉर्ड 23 जेटाजूल गर्मी समा गई है। यह थर्मल एनर्जी इंसानों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली कुल ऊर्जा से लगभग 40 गुना अधिक है। ग्रीनहाउस गैसों की वजह से पैदा होने वाली अतिरिक्त गर्मी का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा और मानव जनित कार्बन डाइऑक्साइड का एक तिहाई हिस्सा अकेले समुद्रों ने ही सोखा है।
रफ्तार से बढ़ रहा समुद्र का जलस्तर
इस अत्यधिक गर्मी के कारण समुद्र का पानी तेजी से गर्म हो रहा है और उसका स्तर लगातार बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 1999 से समुद्र का जलस्तर प्रति वर्ष लगभग 3.8 मिलीमीटर की रफ्तार से बढ़ रहा था, लेकिन 2012 से 2025 के बीच यह गति बढ़कर 4.2 मिलीमीटर प्रति वर्ष हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव हमारी आंखों के सामने हो रहा है, जिससे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र तेजी से नष्ट हो रहा है।
प्रमुख तटीय शहरों और द्वीप देशों पर डूबने का खतरा
समुद्रों में ऑक्सीजन की भारी कमी के कारण जलीय जीवों का जीवन संकट में पड़ रहा है। इसके साथ ही विनाशकारी तूफानों, बादलों के फटने और बेमौसम भारी बारिश की आवृत्ति कई गुना बढ़ जाएगी। यदि स्थिति ऐसी ही रही, तो आने वाले समय में मुंबई, न्यूयॉर्क, टोक्यो और लंदन जैसे दुनिया के कई प्रमुख तटीय शहर और कई द्वीप देश जलमग्न हो सकते हैं, जिससे करोड़ों लोगों को अपने घर-बार छोड़कर बेघर होना पड़ सकता है।





