रायपुर। छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) द्वारा आयोजित एक प्रतियोगी परीक्षा के प्रश्नपत्र में प्रयुक्त शब्द को लेकर नया विवाद उपज गया है। विगत 20 सितंबर को संपन्न हुई परीक्षा के प्रश्नपत्र में शामिल एक लोकोक्ति में ‘नाउ’ शब्द के उपयोग पर सेन समाज ने कड़ा ऐतराज जताया है। समाज के प्रतिनिधियों का आरोप है कि प्रश्नपत्र में इस शब्द का प्रयोग आपत्तिजनक रीति से किया गया है, जिससे उनके पूरे समुदाय की सामाजिक भावनाओं और स्वाभिमान को गहरा आघात पहुंचा है।
प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन और कलेक्टर को ज्ञापन
घटना के विरोध में सेन समाज ने छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रश्नपत्र में प्रयुक्त शब्दावली उनकी जाति और पारंपरिक व्यवसाय के प्रति अपमानजनक संदेश देती है। राजधानी रायपुर में सेन समाज के एक प्रतिनिधिमंडल ने ज़िला कलेक्टर से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और दोषियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की मांग की।
प्रतिनिधियों का तर्क है कि राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे जिम्मेदार मंचों पर ऐसे संवेदनशील एवं विवादास्पद शब्दों के प्रयोग से बचना चाहिए, क्योंकि इससे समाज में नकारात्मक संदेश जाता है। उन्होंने व्यापमं से उक्त प्रश्न को निरस्त करने तथा भविष्य में ऐसी त्रुटियों की पुनरावृत्ति न होने का लिखित आश्वासन मांगा है।
क्या है पूरा विवाद?
उल्लेखनीय है कि 20 सितंबर को आयोजित व्यापमं की परीक्षा में एक प्रश्न के अंतर्गत क्षेत्रीय लोकोक्ति (कहावत) के रूप में ‘नाउ’ शब्द शामिल किया गया था। इस पर आपत्ति दर्ज कराते हुए सेन समाज ने कहा है कि इससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल हुई है। समाज ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञ समिति (पेपर सेटर) की भूमिका की जांच की जाए तथा जवाबदेह व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए।





