मुंबई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एनएसई) के 22,569 करोड़ रुपये के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के तहत बिक्री पेशकश (ओएफएस) में शेयर बेचने के बावजूद, इसके अधिकांश मौजूदा शेयरधारकों ने अपनी हिस्सेदारी का एक बड़ा हिस्सा अपने पास सुरक्षित रखा है।

आईपीओ को शानदार सफलता और दूसरा सबसे बड़ा निर्गम

यह आईपीओ बोली के दूसरे दिन ही पूर्ण अभिदान प्राप्त कर चुका है। यह वर्ष 2024 में हुंडै मोटर इंडिया के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम बन गया है, जिसने वर्ष 2022 के एलआईसी आईपीओ के आंकड़े को भी पीछे छोड़ दिया है।

संस्थागत निवेशकों की सीमित हिस्सेदारी बिक्री

आंकड़ों के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ है कि ओएफएस में मुख्य रूप से संस्थागत निवेशक शामिल थे। आईपीओ से पहले एनएसई की 36.82 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले इन निवेशकों ने अपनी कुल हिस्सेदारी का केवल 5.11 प्रतिशत हिस्सा ही बेचा है। इनमें नौ विदेशी और 11 घरेलू संस्थागत निवेशक (जिनमें 10 सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाएं शामिल हैं) प्रमुख रूप से शामिल रहे।

रणनीतिक हिस्सेदारी और निवेशकों का मजबूत विश्वास

अरांडा इन्वेस्टमेंट्स, स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और एसबीआई कैपिटल मार्केट्स जैसे बड़े शेयरधारकों ने अपनी कुल हिस्सेदारी में औसतन करीब सात प्रतिशत की ही मामूली कमी की है। यह रुख यह दर्शाता है कि ओएफएस ने निवेशकों को आंशिक मुनाफावसूली का अवसर तो अवश्य दिया, लेकिन उन्होंने एनएसई में अपनी बड़ी रणनीतिक हिस्सेदारी बनाए रखकर कंपनी के भविष्य पर अपने मजबूत भरोसे का परिचय दिया है।