लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है। इसी बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने विपक्षी दलों, खासकर समाजवादी पार्टी के सामने गठबंधन का बड़ा प्रस्ताव रख दिया है। ओवैसी के इस ऑफर से राज्य का सियासी पारा चढ़ गया है और विपक्षी दलों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
ओवैसी की गठबंधन की पेशकश
कानपुर के पास एक जनसभा को संबोधित करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने ऐलान किया कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को दोबारा सत्ता में आने से रोकने के इच्छुक किसी भी दल के साथ हाथ मिलाने को तैयार है। उन्होंने इसके लिए 2 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि विपक्षी दल वास्तव में भाजपा को रोकना चाहते हैं, तो वे आगे आएं और बातचीत करें।
अखिलेश यादव के लिए बढ़ी दुविधा
ओवैसी के इस प्रस्ताव ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को पसोपेश में डाल दिया है। एक तरफ अखिलेश राज्य में 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यकों) समीकरण के सहारे आगे बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि AIMIM के साथ जाने पर भाजपा इसे ध्रुवीकरण और तुष्टिकरण के रूप में भुनाने की कोशिश कर सकती है, जिसका नुकसान सपा को उठाना पड़ सकता है।
बिहार चुनाव का दिया हवाला
सभा के दौरान ओवैसी ने बिहार विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि वहां उन्होंने केवल कुछ सीटों की मांग की थी, लेकिन विपक्षी दलों ने न केवल सीटों पर सहमति नहीं दी, बल्कि उन पर कई तरह के झूठे आरोप भी लगाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे विपक्ष वैसी गलती उत्तर प्रदेश में न दोहराए और भाजपा को हराने के लिए व्यावहारिक रुख अपनाए।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल असदुद्दीन ओवैसी ने गठबंधन की गेंद पूरी तरह से अखिलेश यादव और सपा के पाले में डाल दी है। यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या विपक्षी दल ओवैसी के इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं या फिर बिहार की तरह इस बार भी दूरी बनाए रखते हैं।





