हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास और अंग्रेजी कैलेंडर का सितंबर महीना, धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत फलदायक और शुभकारी माना जाता है। सितंबर का आगमन व्रत-त्योहारों की एक नई बहार और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ होता है, जो इसे पूजा-पाठ, व्रत और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए एक आदर्श समय बनाता है। यह माह विशेष रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दौरान कई बड़े पर्व और व्रत पड़ते हैं, जिनका जनमानस के आध्यात्मिक जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
इस दौरान मनाए जाने वाले व्रत और त्योहार, लोगों में नई आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करेंगे और उन्हें धर्म के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करेंगे। इसमें भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव, हरतालिका तीज, गणेश चतुर्थी जैसे प्रमुख पर्वों के साथ-साथ अजा एकादशी और परिवर्तिनी एकादशी जैसे पुण्यकारी व्रत भी मनाए जाएंगे।
महीने की शुरुआत 4 सितंबर (शुक्रवार) को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव, कृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व से होगी। यह दिन देशभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है, जिसमें भक्तगण उपवास रखकर आधी रात को भगवान के जन्मोत्सव का जश्न मनाते हैं। इसके अगले दिन, 5 सितंबर (शनिवार) को दही हांडी का उत्सव मनाया जाएगा, खासकर महाराष्ट्र में यह पर्व अपनी जीवंतता के लिए प्रसिद्ध है।  एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है और इस माह की पहली एकादशी, अजा एकादशी, 7 सितंबर (सोमवार) को पड़ेगी। भगवान विष्णु को समर्पित यह व्रत पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है। 8 सितंबर (मंगलवार) को शिव भक्तों के लिए भौम प्रदोष व्रत है, जबकि इसी दिन से जैन धर्म का महत्वपूर्ण पर्यूषण पर्व भी आरंभ होगा। मासिक शिवरात्रि, भगवान शिव की आराधना का एक और अवसर, 9 सितंबर (बुधवार) को है।
महीने के मध्य में, 14 सितंबर (सोमवार) को दो बड़े पर्व एक साथ आ रहे हैं – हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी। हरतालिका तीज सुहागिन महिलाओं द्वारा पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाने वाला निर्जला व्रत है, जबकि गणेश चतुर्थी के साथ ही 10 दिवसीय गणेश उत्सव का आरंभ होगा, जिसमें भगवान गणेश घर-घर विराजेंगे। गणेश चतुर्थी के अगले दिन, 15 सितंबर (मंगलवार) को ऋषि पंचमी मनाई जाएगी। 17 सितंबर (गुरुवार) को देवताओं के शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाएगी और इसी दिन कन्या संक्रांति भी है, जब सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। 19 सितंबर (शनिवार) को राधा अष्टमी का पर्व मनाया जाएगा, जो राधा रानी के जन्मोत्सव का प्रतीक है। दूसरी महत्वपूर्ण एकादशी, परिवर्तिनी एकादशी, 22 सितंबर (मंगलवार) को है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु अपनी करवट बदलते हैं, जिससे इस व्रत का महत्व और बढ़ जाता है। गुरु प्रदोष व्रत 24 सितंबर (गुरुवार) को पड़ेगा, जो भगवान शिव को समर्पित एक और पवित्र दिन है। गणेश उत्सव का समापन 25 सितंबर (शुक्रवार) को अनंत चतुर्दशी के साथ होगा, जब धूमधाम से भगवान गणेश की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा। माह की अंतिम महत्वपूर्ण तिथि, भाद्रपद पूर्णिमा व्रत, 26 सितंबर (शनिवार) को है। और अंततः, 27 सितंबर (रविवार) से पितृ पक्ष का आरंभ होगा, जो पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और तर्पण का महत्वपूर्ण काल है।