गोरखपुर का दक्षिणांचल यानी बांसगांव। उपेक्षा जिसकी नियति और पलायन परिणति रही। बदलाव का सूर्योदय आज यहां अपनी आभा बिखेर रहा है। गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन पर फर्राटा भरती गाड़ियां विकास की तस्वीर दिखाती हैं। नदियों पर बने पक्के पुल पिछड़ेपन के दाग धो रहे हैं। अनुसूचित जाति के लिए 62 वर्षों से...
Published on 30/05/2024 2:07 PM





